Ad

style="width:640px;height:100px;" alt="ads" /> ads

Breaking News

जिला अस्पताल मे मरीजो को नहीं मिल रहे इंजेक्शन

ड्रेसिंग के लिए लिया जा रहा पैसा, जिलाधिकारी के चैखट पर पहुंचे तीमारदार व मरीज

उन्नाव। चिराग तले अंधेरा वाली कहावत उमाशंकर दीक्षित संयुक्त चिकित्सालय में पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। मुख्यालय से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जिला अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या तो पर्याप्त है और उनको तनख्वाह भी समय से मिल रही है। परंतु जिन उद्देश्यों को लेकर जिला अस्पताल की भारी-भरकम बिल्डिंग और आधा
सैकड़ा डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं। वह पूरा नहीं हो रहा है। ना तो जिला अस्पताल में दवाइयां हैं और ना ही रेबीज के इंजेक्शन। विगत 2 हफ्ते से रेबीज का इंजेक्शन लगाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से आकर लोग परेशान हो रहे हैं। लेकिन उन्हें रेबीज का इंजेक्शन नहीं लग पा रहा है। इस संबंध में तीमारदार और संबंधित डॉक्टरों के बीच काफी मुहा चाही भी हुई। परंतु खास श्रेणी के ना होने के कारण उन्हें सरकारी अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन नहीं लग पाए। जिला अस्पताल के रवैया से हताश परेशान तीमारदार अपने मरीजों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए। यहां की लंबी लाइन उनके लिए अवरोध का काम कर रही थी। समाचार लिखे जाने तक उनकी जिलाधिकारी से मुलाकात नहीं हो पाई थी। परंतु जिला अस्पताल की बदतर स्थिति जरूर सामने आ गई।
उमाशंकर दीक्षित संयुक्त चिकित्सालय की स्थिति दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है। मरीज और उनके तीमारदारों की समस्याओं का कोई पुरसाहाल नहीं है। विगत 15 दिनों से रेबीज का इंजेक्शन लगवाने आ रही मधु दुबे निवासी अकबरपुर दबौली थाना माखी ने बताया कि उसके बेटे को बंदर ने काट लिया था। जिसका इंजेक्शन लगवाने के लिए वह जिला अस्पताल के चक्कर काट रही है। लेकिन वहां पर उसके बेटे को इंजेक्शन नहीं लगाया जा रहा है। इसी प्रकार मांखी थाना क्षेत्र के ही पारा निवासी दिनेश कुमार ने बताया कि उसे कुत्ता ने काट खाया है जिसके लिए इंजेक्शन लगवाने के लिए जिला अस्पताल के चक्कर काट रहा है।
यही स्थिति मांखी थाना क्षेत्र के जगदीशपुर निवासी सूर्यपाल, गंगाघाट थाना क्षेत्र शुक्लागंज निवासी आकिब पुत्र याकूब को भी कुत्ते ने काट खाया था। जिसके लिए वह इंजेक्शन लगवाने जिला अस्पताल आया था। परंतु उसे इंजेक्शन नहीं लगा। उन्होंने बताया कि डॉक्टर कहते हैं इंजेक्शन नहीं है। जबकि खास लोगों को इंजेक्शन लगातार लगाए जा रहे हैं। मधु दुबे ने जिला अस्पताल के कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वहां पर पट्टी बनवाने के लिए उनसे 50 लिए गए जबकि शासन की तरफ से 1 के पर्चा के अतिरिक्त कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एस पी चैधरी ने ने बताया कि जिला अस्पताल की देखरेख मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर डीके द्विवेदी करते हैं इसके जवाबदेही डॉक्टर द्विवेदी की है। उन्होंने कहा कि मरीज ग्रामीण क्षेत्र में स्थित सीएचसी या पीएचसी में जाकर रेबीज का इंजेक्शन लगवा सकता है।                

No comments