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शादी से पहले काटने पड़ रहे कलेक्ट्रेट औऱ थानों के चक्कर

उन्नाव - रश्मों, सभ्यताओं और त्योहारों से पहचाने जाने वाले देश भारत में जहाँ  शादी को  दो दिलों,दो परिवारों को मिलने वाला एक पवित्र बंधन है। भारतवर्ष में शादी को सात जन्मों का रिश्ता माना जाता है। वहीं दूसरी ओर शादी से पहले डीजे व बैंड की अनुमति के लिए दूल्हा व दुल्हन के परिजन निमंत्रण पत्र और कुछ कागज लेकर कलेक्ट्रेट और थानों के चक्कर लगाते नजर आ रहे हैं। मिठाई और शुकराने के नाम पर जेब ढीली कराने में कोई संकोच नही किया जा रहा है। अगर आपने मुँह मीठा करने में कोई कसर छोड़ी तो आपके चक्कर और बढ़ जाएंगे।

हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति के लाउडस्पीकर बजाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन की अनुमति के बाद ही  लाउडस्पीकर बज सकेगा। ऐसे में शादी से पहले वर,वधू के परिजन अनुमति के लिए कलेक्ट्रेट व थानों के चक्कर लगा रहे है। अब कलेक्ट्रेट और थानों में लोग  दिन भर शादी का कार्ड हाथ मे पकड़े परेशान नजर आते है। मुश्किल बात तो यह है कि डीजे,बैंड,आर्केस्ट्रा और गेस्टहाउस संचालक बगैर अनुमति पत्र के बुकिंग करने को तैयार ही नही है। और शादी जैसे खुशी के पल में बिना डीजे,बैंड के इनका काम भी नही चल सकता। लोगों की मुश्किलें बढ़ती देख दलाल भी पनपने लगे है। अभी हाल में ही उन्नाव एआरटीओ में पड़े छापे में कई दलालों को जेल भी हुई थी। अभी तक दलाल केवल एआरटीओ कार्यालय में थे।लेकिन अब दलालों का असर अब कलेक्ट्रेट कार्यालय पर भी पडने लगा है। चूंकि यह फरमान अभी नया है। इसलिए दलालों के अभी हाथ पैर पूरी तरह नही खुले है।

*बीस से पचास रुपये तक बिक रहा अनुमति पत्र का प्रारूप*

कार्यालयों में अनुमति पत्र का प्रारूप न मिलने पर  लोगों को  बाजार से लेना पड़ रहा है। लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए दुकानदार 20 रु से 50 रुपये तक प्रारूप बेच रहा है।

कहाँ से लें अनुमति कुछ पता नही।


कलेक्ट्रेट कार्यालय में ध्वनि यंत्रों के  प्रयोग के लिए अनुमति लेने पहुंचे लोग परेशान हो रहे है।अभी तक हेल्प डेस्क की ब्यवस्था नही की गई ।

डीजे के आवेदनों की भरमार

सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के स्टेनो चंद्रशेखर शुक्ला ने बताया कि इस कानून के बाद से आवेदनो  की भरमार है।रोज तकरीबन 100 से भी ज्यादा आवेदन आ रहे है।इसमें सबसे अधिक डीजे के आवेदन है।

इस गंभीर समस्या को देखते हुए जब कई लोगों से बात की गई तो कई परिणाम सामने आए कई लोगों ने सरकार पर निशाना साधते हुए सरकार की मनमानी बताया । तो  कई लोगों ने इस नियम को तानाशाही नियम बताया है। ये  तो कुछ भी नही कई परिजनों ने तो इसकी तुलना  साइमन कमीशन से की है।


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