रवन्ना तय करता है स्लाटर में किस पशु का होगा प्रवेश
उन्नाव। स्लाटर हाउस में कटने के लिए प्रदेश ही नहीं दूसरे प्रदेश की पशु मंडियों से आने वाले पशुओं का रवन्ना ही उनकी पहचान होता है। इस रवन्ने के आधार पर पशु कटने योग्य है या नहीं इसकी भी पुष्टि होती है। स्लाटर हाउस के अंदर इनके लगने के बाद ही उनका दाखिला संभव हो पाता है। इन्हीं दस्तावेजों को पूरा करने के लिए स्लाटर हाउस और जिम्मेदार विभाग के कारखास उनका जुगाड़ करते हैं। इसके बाद ही मवेशी के स्लाट¨रग की प्रक्रिया पूरी की जाती है। स्लाटर हाउस आने वाले पशुओं के सही होने का कागजी साक्ष्य मंडी से खरीद फरोख्त में प्रयोग होने वाला रवन्ना होता है। लेकिन इस रवन्ने पर वाहन नंबर दर्ज होने के कारण वह दस्तावेजी गवाह भी बनते हैं। लेकिन एक ट्रक के लिए उतने ही रवन्ने कट सकते हैं जितने पशुओं की उसपर लादने की क्षमता होती है। इसी कारण से रवन्ने के जुगाड़ का खेल स्थानीय स्तर पर खेला जाता है। सूत्रों की माने तो ट्रकों पर जो पशु मंडी से खरीद कर बिना रवन्ने के आते हैं उनके लिए यहां दूसरी मंडियों से अलग रवन्ना का जुगाड़ किया जाता है, जिसकी तीन से चार गुना अधिक कीमत प्रति पशु की दर से वसूल की जाती है। यह खेल कोई एक दो दिन का नहीं बल्कि वर्षों से चल रहा है और उसी की आड़ में मनमाने तरीके से पशुओं को क्रूरता पूर्वक ट्रकों से ढोया जा रहा है। इस खेल में ट्रक चालक, व्यापारी, फैक्ट्री प्रबंधन और पशुओं के स्वास्थ्य पर नजर रखने वाले चिकित्सक सभी शामिल होते हैं। व्यापारियों और ट्रकों से वसूली जाने वाली कीमत का भी बकायदा बाजार मालिकों से लेकर जारी करने वाले लोगों तक में बटवारा किया जाता है।
क्या है रवन्ना: जानते हैं एक नजर में-
रवन्ना पशु बाजार में बिक्री के दौरान पशु चिकित्सकों के द्वारा पशुओं
का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद जारी किया जाता। उसमें पशु की शारीरिक
स्थिति के अलावा स्वास्थ्य की रिपोर्ट दर्ज होती है और उसकी उस ट्रक या
दूसरे वाहन का भी उल्लेख होता है जिससे उसे लाया जाता है। वाहन संख्या के
कारण ही रवन्ने की संख्या प्रति वाहन सीमित रहती है। बाजार से लाने के
दौरान जारी रवन्ने के आधार पर ही स्लाटर हाउस में उनका प्रवेश तय होता है।

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