हैदराबाद मक्का मस्जिद धमाके के 11 साल बाद सभी अभियुक्त बरी
-हिन्दू राज मिस्त्री के अधीन करीब आठ हज़ार मजदूरों ने किया था निर्माण कार्य
डेस्क। हैदराबाद की एक निचली अदालत ने 11 साल पहले हुए
मक्का मस्जिद धमाके के सभी अभियुक्तों को
बरी कर दिया है। जिसके बाद राजनैतिक गलियारों में इसकी गूँज साफ़ सुनाई दे रही है।
बताते चलें 18 मई, 2007 को ये धमाका शहर के चार मीनार इलाक़े के पास स्थित मस्जिद
के वज़ुख़ाने में हुआ था। जिसमें 16 लोग मारे गए थे। इनमें वो पांच लोग भी शामिल हैं जिनकी मौत
घटना के बाद उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोली
लगने से हुई। शुरुआत में इस
धमाके को लेकर चमपंथी संगठन हरकतुल जमात ए इस्लामी यानी हूजी पर शक की उंगलियां
उठीं। लगभग 50
से
ज़्यादा मुसलमान युवकों को इस धमाके के सिलसिले में हिरासत में लिया गया। आंध्र प्रदेश का आतंकवाद निरोधी दस्ता सहित, नेशनल इंवेस्टिगेटिंग एजेंसी (एनआईए)
और सीबीआई ने मामले की अलग-अलग जांच की। मगर तीन सालों के बाद यानी 2010 में पुलिस ने 'अभिनव भारत' नाम के संगठन से जुड़े स्वामी असीमानंद
को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद स्वामी असीमानंद ने ऐसा बयान दिया जिसने
सबको चौंका दिया. उन्होंने धमाकों में गिरफ्तार किए गए मुसलमान लड़कों से
सुहानुभूति जताते हुए कहा कि वो युवक बेक़सूर हैं। इस मामले में गिरफ्तार किए गए युवक
जागीरदार, अब्दुल नईम, मोहम्म्द इमरान खान, सईद इमरान, जुनैद और रफीउद्दीन अहमद को अदालत ने
बरी कर दिया था बाद में आंध्र प्रदेश के अल्पसंख्यक आयोग ने 61 ऐसे मुसलमान युवकों को बाद में उनकी
बेगुनाही के सेर्टिफ़िकेट भी दिए। स्वामी असीमानंद के अलावा 'अभिनव भारत' से जुड़े लोकेश शर्मा, देवेंद्र गुप्ता और साध्वी प्रज्ञा
सिंह ठाकुर को इस धमाके का अभियुक्त बनाया गया। इन अभियुक्तों में से कुछ समझौता
एक्सप्रेस और मालेगांव धमाकों के भी अभियुक्त बनाए गए हैं। हालांकि एनआईए ने अदालत में कहा है कि
उसे लोकेश शर्मा और देवेंद्र गुप्ता के ख़िलाफ़ ज़्यादा सबूत नहीं मिल पाए हैं। भारत में सबसे
बड़े आंगन वाली मक्का मस्जिद क़ुतुब शाही का एक और ऐतिहासिक चिह्न मानी जाती है।
चार मीनार के
क़रीब बनी इस मस्जिद की नींव भी सातवें क़ुतुब शाही सुल्तान मोहम्मद क़ुतुब ने 1616-17 में रखी थी. इसका नक़्शा
इंजीनियर फ़ैजुल्लाह बेग़ ने तैयार किया था। लेकिन औरंगज़ेब के हमले की वजह से इस
मस्जिद का काम बीच में ही रोकना पड़ा था. इतिहासकार इस मस्जिद से जुड़ी एक दिलचस्प बात
बताते हैं कि इसका का राज मिस्त्री एक हिंदू था जिसकी निगरानी में आठ हज़ार
मजदूरों ने मिलकर इसे बनाया था।


No comments