जेल में विधायक दरबार
उन्नाव। विधायक
कुलदीप सिंह सेंगर को जेल भेजने के बाद जेल प्रशासन खातिरदारी में जुट गया है. वहीं सीबीआइ अब हत्या षड्यंत्र के आरोप में
रिमांड पर लेने की तैयारी में लग गई है। माना जा रहा है कि सीबीआइ यह कार्रवाई
शीघ्र ही पूरी कर सकती है। सोमवार से मंगलवार के बीच कभी भी सीबीआइ विधायक की
रिमांड ले सकती है या फिर सीबीआइ कोर्ट का बी वारंट पाक्सो कोर्ट में दाखिल कर
विधायक को लखनऊ ले जा सकती है। सूत्रों की मानी जाए तो जो दरबार कभी विधायक निवास में सजा करता था आज जेल में विधायक दरबार सज रहा है। जेल
प्रबंधन ने विधायक के खास लोगों को अंदर लेने के लिए 'डमी मिलाई' का खेल खेला। माखी कांड में
पीडि़ता के पिता की हत्या में विधायक के भाई अतुल सेंगर समेत पांच आरोपितों को जेल
भेजा जा चुका है। पीडि़ता ने विधायक और उनके करीबियों पर पिता की हत्या का
षड्यंत्र रचने की तहरीर दी थी। सीबीआइ पीडि़ता के पिता की हत्या और हत्या से पूर्व
उस पर दर्ज कराए मुकदमे की जांच कर रही है। पाक्सो एक्ट मामले में सीबीआइ ने
विधायक और सहयोगी को पूछताछ के बाद शुक्रवार को जेल भेजा था। पीडि़ता के पिता की
हत्या के षड्यंत्र में विधायक और उसके करीबियों की किस हद तक भूमिका रही, इसकी जांच कर रही सीबीआइ टीम ने विधायक से डाक्टर और पुलिस कर्मियों के बीच
बातचीत की कॉल डिटेल के साथ अन्य साक्ष्य जुटा लिए हैं। दो मई तक सीबीआइ को अब की
जांच और साक्ष्यों के साथ कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल करनी है।
इसके चलते सीबीआइ हत्या के षड्यंत्र में विधायक की रिमांड की तैयारी कर रही है।
विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से जेल में मिलने रविवार को उनके समर्थक पहुंचेंगे, यह बात जेल प्रशासन को अच्छी तरह से मालूम थी। कोई कार्य नियम विरुद्ध न हो और
समर्थक भी मायूस न हों, इसका जेल प्रशासन ने ख्याल रखा। पहले से ही
तैयार योजना का समर्थकों को पूरा लाभ मिला और जेल में विधायक का दरबार लगा। जेल
प्रबंधन ने विधायक के खास लोगों को अंदर लेने के लिए 'डमी मिलाई' का खेल खेला। कागजों में तो मिलने वालों की
संख्या तीन रही लेकिन, इस खेल में कई करीबियों को चेहरा दिखाने और
मुसीबत में विधायक का खास बनने का मौका मिल गया। रविवार को दो
पालियों में बंदियों और कैदियों से मिलने कुल 242 लोग पहुंचे। जेल
प्रशासन का दावा है कि इस दौरान नियमानुसार विधायक से महज तीन लोगों को मिलने दिया
गया। इस दावे से इतर खेल कुछ और ही खेला गया। सूत्रों के मुताबिक मिलाई करने वाले 242 लोगों में एक तिहाई विधायक के ही समर्थक थे। इन्हें दूसरे बंदियों से मिलाई की
पर्ची देकर जेल के अंदर लिया गया। जेल प्रबंधन ने दूसरे बंदियों से मिलाई की
पर्चियां काटी, वो थीं तो उनके रिश्तेदारों या सहयोगियों के
नाम की लेकिन, मिलाई विधायक के समर्थकों ने की। सभी को
कैमरों की जद से बचाते हुए विधायक तक ले जाया गया। जेल में विधायक
से मिलकर निकले समर्थकों के अति उत्साह और आपसी चर्चा ने जेल प्रबंधक के खेल की
कलई खोलकर रख दी। उनकी आपसी चर्चा को किसी तीसरे ने सुन लिया और यह बात सार्वजनिक
कर दी। सीबीआइ जांच के बीच जेल प्रशासन के विधायक के इशारों पर नाचने की चर्चा दिन
भर चर्चा बनी रही। शुक्रवार को विधायक के जेल भेजे जाने के साथ ही उनके कुछ
करीबियों को जुगाड़ से अंदर प्रवेश दिलाया गया था।

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