मरीज दो, बेड एक-जिला अस्पताल का यह रोज का नजारा बना
उन्नाव। जिले के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की तो बात छोड़िए जिला अस्पताल की हालत भी किसी मायने में अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से कमतर नहीं है। जिले के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से गंभीर मरीजों के अलावा सर्दी, बुखार व डायरिया रोगों से पीड़ित मरीजों को भी जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। तो जिला अस्पताल में भी मरीजों को मायूस होकर अन्य निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। यह हाल तब है जब सीएचसी व पीएचसी पर ऐसे रोगों से पीड़ित मरीजों का उपचार करने के सभी संसाधन उपलब्ध हैं। सामान्य मरीजों के रेफर होकर आने से जिला अस्पताल पर बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में कई बार गंभीर मरीजों को बेड नहीं मिल पाते हैं। एक बेड पर दो-दो मरीजों को लिटाकर उपचार किया जाता है।
जिले में 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व 37 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके अलावा 6 ब्लाक स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 30 मरीजों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दो मरीजों को 24 घंटे भर्ती करने की सुविधा रहती है। दिन में ओपीडी का संचालन होता है। शासन स्तर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सभी तरह के मरीजों को भर्ती करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके बावजूद यहां मरीजों को रेफर करने का खेल चल रहा है। जिला अस्पताल में डायरिया, बुखार, सड़क हादसों या किसी अन्य हादसों में मामूली तौर पर घायल होने वाले लोग रेफर कर भेजे जा रहे हैं। अधिक संख्या में मरीजों के आ जाने से कई बार यहां से भी मरीजों को कानपुर रेफर कर दिया जाता है। कभी कभी दो-दो मरीजों को एक बेड पर लिटाकर उपचार किया जाता है।
रात में नहीं रुकते डाक्टर
सीएचसी व पीएचसी पर डाक्टर रात में रुकना पसंद नहीं करते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र में तैनात फार्मासिस्ट मरीज को जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं।
मामले की कराई जाएगी जांच
नवागत सीएमओ डा. लालता प्रसाद ने बताया कि उन्होंने अभी चार्ज संभाला है। ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच होगी। जिस सीएचसी से अधिक मरीज रेफर होकर आ रहे, वहां कारणों की तलाश की जाएगी। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई होगी।
एक सप्ताह में रेफर हुए 250 मरीज
सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से एक सप्ताह में 250 मरीज रेफर होकर जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार अधिकतर मरीज ऐसे थे जिनका पूरा इलाज सीएचसी पर संभव था। इसके बाद भी इन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। कई बार ऐसे मरीज रेफर होकर आते हैं, जिनका प्राथमिक उपचार भी नहीं किया जाता है।
चिकित्सकों की कमी
विशेषज्ञों के पद स्वीकृत उपलब्ध
फिजीशियन 14 शून्य
एनेस्थेटिस्ट 14 06
सर्जन 14 01
स्त्री रोग विशेषज्ञ 14 01
रेडियोलॅाजिस्ट 14 07
रात में नहीं रुकते डाक्टर
सीएचसी व पीएचसी पर डाक्टर रात में रुकना पसंद नहीं करते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र में तैनात फार्मासिस्ट मरीज को जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं।
मामले की कराई जाएगी जांच
नवागत सीएमओ डा. लालता प्रसाद ने बताया कि उन्होंने अभी चार्ज संभाला है। ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच होगी। जिस सीएचसी से अधिक मरीज रेफर होकर आ रहे, वहां कारणों की तलाश की जाएगी। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई होगी।
एक सप्ताह में रेफर हुए 250 मरीज
सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से एक सप्ताह में 250 मरीज रेफर होकर जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार अधिकतर मरीज ऐसे थे जिनका पूरा इलाज सीएचसी पर संभव था। इसके बाद भी इन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। कई बार ऐसे मरीज रेफर होकर आते हैं, जिनका प्राथमिक उपचार भी नहीं किया जाता है।
चिकित्सकों की कमी
विशेषज्ञों के पद स्वीकृत उपलब्ध
फिजीशियन 14 शून्य
एनेस्थेटिस्ट 14 06
सर्जन 14 01
स्त्री रोग विशेषज्ञ 14 01
रेडियोलॅाजिस्ट 14 07

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