RBI ने किया फैसला,बांड में विदेशी निवेश के नियमों में दी जाएगी राहत
RBI ने फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआइ) की ओर से निवेश के नियमों में रियायत देने का किया फैसला
डेस्क। आरबीआई ने फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स एफपीआइ की ओर से निवेश के नियमों में रियायत देने का फैसला किया है। इससे आरबीआइ ने दोहरे हित साधने का प्रयास किया है।
विदेशी निवेश बढ़ने से विदेशी मुद्रा की आमद बढ़ेगी तो रुपये में गिरावट थामने में मदद मिलेगी, वहीं कर्ज के रूप में बड़ी कंपनियों के बांड में निवेश बढ़ने से कॉरपोरेट बांड की गिरती मांग में सुधार होगा।
एफपीआइ को सरकारी बांड, ट्रेजरी बिल, स्टेट डवलपमेंट बांड और कॉरपोरेट बांड जैसे डेट मार्केट के उत्पादों में निवेश की अनुमति दी गई है। हालांकि उन पर कुछ पाबंदियां रहेंगी।
सरकारी बांड में अब एफपीआइ निवेश 30 फीसद तक हो सकता है। पहले यह सीमा 20 फीसद थी। एफपीआइ कम से कम तीन साल की परिपक्वता वाले बांड में ही निवेश कर सकेंगे।
एफपीआइ के कुल निवेश में लघुकालिक निवेश की हिस्सेदारी 20 फीसद से ज्यादा नहीं हो सकती है। आरबीआइ के अनुसार कॉरपोरेट बांड में एफपीआइ को कम से कम तीन साल के लिए निवेश करने की अनुमति दी गई है।
कॉरपोरेट बांड में एफपीआइ के कुल निवेश में लघुकालिक निवेश 20 फीसद से ज्यादा नहीं हो सकता है। हालांकि 27 अप्रैल 2018 से पहले के निवेश को लघुकालिक निवेश सीमा से अलग रखा गया है।
एफपीआइ के कुल निवेश में लघुकालिक निवेश की हिस्सेदारी 20 फीसद से ज्यादा नहीं हो सकती है। आरबीआइ के अनुसार कॉरपोरेट बांड में एफपीआइ को कम से कम तीन साल के लिए निवेश करने की अनुमति दी गई है।
कॉरपोरेट बांड में एफपीआइ के कुल निवेश में लघुकालिक निवेश 20 फीसद से ज्यादा नहीं हो सकता है। हालांकि 27 अप्रैल 2018 से पहले के निवेश को लघुकालिक निवेश सीमा से अलग रखा गया है।

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