सीमाओं के अवैध घाट बने देश की सुरक्षा में बाधक

निघासन-खीरी। भारत-नेपाल सीमा पर संचालित अवैध घाटो से जहाँ देश की सुरक्षा में बाधा बन रहे हैं, वही इन घाटो से तस्करी भी खूब हो रही है। तैनात सुरक्षा एजेन्सियां चाह कर भी अवैध घाटो को बंद कराने का साहस नही जुटा पा रही है। जिससे आम जन में असुरक्षा का माहौल बन चुका है।
भारत-नेपाल सीमा पर आवागमन बीते कई दशकों से नाव द्वारा होता आया है। नाव संचालन के लिये वन विभाग, ग्राम पंचायत, जिला पंचायत खुली बोली लगाकर ठेका देती आईं हैं। बीते वर्ष खकरौला घाट पर नेपाल सरकार द्वारा पुल बनाने के बाद यहाँ नाव का संचालन बंद हो गया। संचालन बंद होते ही इन वैध घाटों के साथ-साथ कई अवैध घाट भी सुविधानुसार संचालित होने लगे, जो धीरे-धीरे तस्करी के लिये सुगम होते चले गए। कुछ वर्ष पूर्व तृतीय बटालियन के सेनानायक ने इन अवैध घाटो को बंद करने का बीड़ा उठाया था। लेकिन मातहतों का पूर्ण सहयोग न मिलने के चलते घाट निर्बाध गति से चलते रहे। इन अवैध घाटो पर देश विरोधी गतिविधियों को रोकने के लिये एसएसबी की पैनी नजर रहती हैं। उसके बाबजूद यह घाट अवैध व्यापार कराने में सफल हो ही जाते हैं।
सूत्र की माने तो समय सीमा पर संचालित डॉक्टर घाट सबसे ज्यादा चर्चित हैं। इस घाट के संचालन पर हमेशा उंगलिया उठती रही हैं। समय समय पर यहाँ से कई मादक पदार्थ के सीजर भी इसी घाट पर या इसके आसपास होने के समाचार प्राप्त होते रहते हैं। अवैध घाटो से चोरी की मोबाइक सहित अन्य प्रतिबंधित वस्तुएँ भी नेपाल चली जाती हैं। सुरक्षा एजेंसियां हाथ मलते रह जाती हैं।
अब सवाल यह है कि यदि सीमा पर खकरौला घाट, मारियाघाट, गुलरिया घाट वैध रूप से संचालित हैं, इसके बावजूद अवैध रूप से चल रहे घाटो को संचालन प्रशासन की नाक के नीचे कैसे मुमकिन हैं। सूत्रों की माने तो तस्कर तिकुनियां के स्थानीय व्यापारी हैं।
उसकी पुष्टि इससे होती है की कुछ समय पूर्व इंडोनेपाल सीमा पर पकडें गये तस्करों को कपड़ा सहित छुडवाने की पुरजोर कोशिश विशेष स्थानीय व्यापारी कर रहे हैं। वहीं आयकर विभाग इस कपड़ें की लागत व बिलरशीदों की निष्पक्ष जाँच कर ले तो हकीकत खुद-ब-खुद सामने आ जायेगी। आयकर विभाग ऐसी कार्रवाई करने की सोंच भी नहीं सकता।कहीं न कहीं इनकी भी कोई मजबूरी अवश्य होगी।
रिपोर्ट
श्रवण सिंह
निघासन लखीमपुर खीरी।
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