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देश की रक्षा करते हुए जनपद का लाल शहीद

शहीद लाल अरविंद विमल
उन्नाव।  बुधवार की रात जनपद का सपूत देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया । गणतंत्र दिवस से पूर्व भारत-बाग्लादेश सीमा से सटे दिनहाटा (कूच बिहार, पश्चिम बंगाल) के दो नंबर ब्लॉक साहेबगंज के दुर्गानगर में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के 42 नंबर बटालियन के जवान का हाथ-पैर बाधकर उसके ही सर्विस राइफल से गोली मारकर हत्या कर दी गई। 
इस वारदात से बीएसएफ जवान व अधिकारी सकते में हैं।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि बुधवार रात को अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। गोली की आवाज सुनते ही बीएसएफ के अन्य जवान मौके पर पहुंचे तो देखा कि अरविंद का शव पड़ा हुआ है। उसका हाथ-पैर बंधा था। सूचना मिलते ही बीएसएफ कूचबिहार सेक्टर के डीआइजी सीएल वेलवा घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने जवानों से घटना के संबंध में पूछताछ की। गुरुवार की सुबह कूचबिहार के पुलिस अधीक्षक डॉ. भोलानाथ पाडेय समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसपी भोलानाथ पाडेय ने बताया कि घटनास्थल से हमें कुछ चीजें मिली हैं। मामले की गहन जाच जारी है।
बीएसएफ जवान अरविंद कुमार को किसने और क्यों गोली मारी, इसका पता नहीं चल पाया है। गौरतलब है कि साहेबगंज इलाके से अक्सर गायों की तस्करी होती है। खासकर ठंड के मौसम में तस्करी काफी बढ़ जाती है। कुहासा का फायदा उठाकर तस्कर यहा से मवेशियों की तस्करी करते हैं। इसे लेकर तस्करों और बीएसएफ के जवानों के बीच कई बार मुठभेड़ भी हुई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मृतक बीएसएफ जवान के शव के पास वॉकी- टॉकी, जवान का सर्विस राइफल, एक जूता व धारदार हथियार मिला है। पुलिस का अनुमान है कि जवान की हत्या तस्करों ने की होगी।
 सांसें थमने के साथ टूट गई दूल्हे के रूप में देखने की तमन्ना
भारत-बांग्लादेश सीमा पर पश्चिम बंगाल के कूच बिहार बार्डर पर ड्यूटी के दौरान शहीद हुए बीएसएफ जवान के लिए पूरा क्षेत्र रोया। होनहार बेटे को दूल्हे के रूप में देखने की परिवार की तमन्ना उसकी सांसें थमने के साथ ही दम तोड़ गई। मां और भाइयों ने हैदराबाद कस्बे में उसके लिए लड़की भी देख रखी थी। जिसके चलते जवान को फरवरी माह में घर आना था। गुरुवार भोर पहर बीएसएफ के एरिया कमांडर ने फोन कर जवान के शहीद होने की जानकारी परिजनों की दी, सारे अरमान चकनाचूर हो गए।
आसीवन के कस्बा रसूलाबाद के मोहल्ला अटल नगर निवासी शहीद बीएसएफ जवान अरविंद कुमार विमल पांच भाइयों में तीसरे नंबर का था। शुरुआत से ही पढ़ाई में होनहार अरविंद ने देश की सेवा की इच्छा से बीएसएफ में जाने का इरादा बनाया। बड़ा भाई धर्मेंद्र, जितेन्द्र भी उसकी लगन देखकर हर कदम पर उसकी मदद को तैयार रहे। बीस वर्ष पहले पिता के कहीं चले जाने और फिर घर न लौटने पर बड़े भाई धर्मेंद्र पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। भाई जितेंद्र और अरविंद के साथ अन्य छोटे भाई चंद्रशेखर व पवन कुमार की पढ़ाई लिखाई में उसने कोई कमी नहीं होने दी। बच्चों का प्यार मिलने से मां बेलपति को पति की याद नहीं सताई। दो बेटों की शादी के बाद वर्ष 2011 में बीएसएफ में कांस्टेबल पद पर भर्ती हुए मंझले बेटे अर¨वद की शादी के लिए वह रिश्ता ढूंढ़ रही थी। लगभग कन्या का चुनाव भी हो गया था। बस अर¨वद को आकर हामी भरनी थी। फरवरी माह में बेटे के आने की राह देख रही मां बेलपति को जैसे ही बेटे की शहादत की सूचना मिली वह बदहवास हो गई। परिजन उसे यही दिलासा देते रहे कि बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। सुबह से ही घर पर कस्बा व आसपास क्षेत्र के लोगों का मजमा लगा रहा। बिलख रहे परिवार को देख हर एक की आंख नम हो गई।
जनपद में शोक की लहर
जनपद अलग-अलग स्थानों पर शहीद लाल को लेकर लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। बिछिया क्षेत्र के समाजसेवी योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि  शहीदों की वजह से आज देश की सीमाएं सुरक्षित हैं। इंदिरा नगर के समाजसेवी अजय त्रिवेदी ने बताया आज हम ऐसे शहीदों की वजह से स्वतंत्र देश में सांस ले रहे हैं हम इनके सदैव ऋणी रहेंगे।

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