रेलवे निर्माण कार्य देख रहे कर्मी डाल रहे गरीबों के हक पर डाका
उन्नाव।
गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को मिलने वाला सस्ता ईधन उन्नाव रेलवे स्टेशन पर पटरियों को मजबूत करने में फूंका जा रहा है। यहां नियम व कानून कार्यरत कर्मचारियों के ठेंगे पर हैं। इसके पीछे की वजह सेक्शन अधिकारियों का 'आर्शीवाद' है। इस ईधन में कामर्शियल गैस सिलेंडर का खर्च दिखाया जा रहा है। जबकि प्रयोग में लिए जा रहे सिलेंडर पर 'प्रधानमंत्री उज्जवला योजना' लिखा हुआ है।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में उज्जवला योजना एक है। इसके तहत गरीबों के घरों की रसोई से धुआं हटाने का कार्य किया जा रहा है। लेकिन, गरीबों के घर की इस आंच का प्रयोग उन्नाव रेलवे स्टेशन पर पटरियों को मजबूत करने में किया जा रहा है। ट्रैक के जर्जर नट बोल्ट को काटने के लिए इसका प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। इसे न तो सेक्शन के इंजीनियर देख रहे हैं ना ही लखनऊ रेल मंडल से आने वाले अधिकारी। उनकी नजर सिर्फ विकास कार्यों पर पड़ रही है और आदेश कार्य में और तेजी लाने के हो रहे हैं। जैसे भी कार्य हो इसकी परवाह नहीं की जा रही है। इसका फायदा जमकर प्लेटफार्म से लेकर ट्रैक पर उठाया जा रहा है। मरम्मत कार्यों के लिए जो कटाई या वेल्डिंग का कार्य हो रहा है, उसमें घरेलू गैस सिलेंडर प्रयोग में लाया जा रहा है। यह सिलेंडर गरीबों के हक के हैं। जिसे कामर्शियल गैस सिलेंडर का नाम देकर चोरी छिपे ट्रैक पर फूंका जा रहा है। रविवार को उन्नाव स्टेशन के एक नंबर ट्रैक आउटर (पश्चिम केबिन की ओर) पर सिलेंडर का प्रयोग होता रहा और कोई रोकटोक नहीं की गई। इसी प्रकार फुट ओवरब्रिज पर भी घरेलू गैस सिलेंडर फूंका गया लेकिन यहां भी जिम्मेदारों ने आंखों पर पट्टी बांध ली।
गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को मिलने वाला सस्ता ईधन उन्नाव रेलवे स्टेशन पर पटरियों को मजबूत करने में फूंका जा रहा है। यहां नियम व कानून कार्यरत कर्मचारियों के ठेंगे पर हैं। इसके पीछे की वजह सेक्शन अधिकारियों का 'आर्शीवाद' है। इस ईधन में कामर्शियल गैस सिलेंडर का खर्च दिखाया जा रहा है। जबकि प्रयोग में लिए जा रहे सिलेंडर पर 'प्रधानमंत्री उज्जवला योजना' लिखा हुआ है।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में उज्जवला योजना एक है। इसके तहत गरीबों के घरों की रसोई से धुआं हटाने का कार्य किया जा रहा है। लेकिन, गरीबों के घर की इस आंच का प्रयोग उन्नाव रेलवे स्टेशन पर पटरियों को मजबूत करने में किया जा रहा है। ट्रैक के जर्जर नट बोल्ट को काटने के लिए इसका प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। इसे न तो सेक्शन के इंजीनियर देख रहे हैं ना ही लखनऊ रेल मंडल से आने वाले अधिकारी। उनकी नजर सिर्फ विकास कार्यों पर पड़ रही है और आदेश कार्य में और तेजी लाने के हो रहे हैं। जैसे भी कार्य हो इसकी परवाह नहीं की जा रही है। इसका फायदा जमकर प्लेटफार्म से लेकर ट्रैक पर उठाया जा रहा है। मरम्मत कार्यों के लिए जो कटाई या वेल्डिंग का कार्य हो रहा है, उसमें घरेलू गैस सिलेंडर प्रयोग में लाया जा रहा है। यह सिलेंडर गरीबों के हक के हैं। जिसे कामर्शियल गैस सिलेंडर का नाम देकर चोरी छिपे ट्रैक पर फूंका जा रहा है। रविवार को उन्नाव स्टेशन के एक नंबर ट्रैक आउटर (पश्चिम केबिन की ओर) पर सिलेंडर का प्रयोग होता रहा और कोई रोकटोक नहीं की गई। इसी प्रकार फुट ओवरब्रिज पर भी घरेलू गैस सिलेंडर फूंका गया लेकिन यहां भी जिम्मेदारों ने आंखों पर पट्टी बांध ली।

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