मौसम में गर्माहट से गेहूं की फसल को नुकसान
उन्नाव। ठंड पड़ना शुरू हुई तो गेहूं उत्पादकों में अच्छी
पैदावार होने की उम्मीद जागी थी, लेकिन एक पखवारा के भीतर ही मौसम में
गर्माहट आने से किसानों के माथे पर सिलवटें पड़ने लगीं हैं। दो दिन से खिल
रही धूप ठंड से राहत भले दे रही हो पर किसानों को ये रास नहीं आ रही। कृषि
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि दाना फूलने से पहले मौसम में गर्माहट गेहूं की
फसल को नुकसान पहुंचाएगी। उनका कहना है पछेती गेंहू का फसल उत्पादन गिरेगा।
प्रगतिशील किसानों का भी मानना है कि पिछले वर्ष की तरह पैदावार गिरने के
आसार बनते दिख रहे हैं।
दो वर्ष से लगातार सूखा की मार से बेहाल किसानों को लगा कि इस बार मौसम साथ दे गया है। कड़ाके की ठंड पड़ना शुरु हुई तो गेहूं उत्पादकों को उम्मीद जागी इस बार रबी की फसल अच्छी होगी। किसानों को उम्मीद थी कि अगले पंद्रह दिन तक ऐसा ही मौसम रहा तो पौधे की ग्रोथ बढ़ जाएगी। लेकिन तीन दिन से लगातार निकल रही धूप ने किसानों की ¨चता बढ़ा दी है। कृषि वैज्ञानिकों का भी मानना है कि मौसम में जिस तरह का परिवर्तन हुआ है अगर बरकरार रहा तो निश्चित रूप से गेहूं की पैदावार पर असर पड़ेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन किसानों ने गेहूं की समय से बोआई कर दी थी उनकी फसल पर तो मौसम के करवट बदलने का कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन दिसंबर में बोआई करने वाले किसानों की फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा पैदावार भी घटेगी। प्रगतिशील किसान सकरन के हरिश्चंद्र, जंसार के बिरजू, टिकरा के भागीरथ के मुताबिक अगर अभी दस दिन और इसी तरह ठंड पड़ती तो गेहूं की फसल बहुत अच्छी होती लेकिन तीन दिन से मौसम जिस तरह से बदल रहा है उससे पछेती गेहूं की फसल का उत्पादन गिरने की संभावना बन गई है। जिला कृषि अधिकारी अतींद्र ¨सह ने कहा कि पछेती गेहूं बोने वाले किसान दवा का छिड़काव और समय से ¨सचाई कर उत्पादकता गिरने से रोक सकते हैं।
दो वर्ष से लगातार सूखा की मार से बेहाल किसानों को लगा कि इस बार मौसम साथ दे गया है। कड़ाके की ठंड पड़ना शुरु हुई तो गेहूं उत्पादकों को उम्मीद जागी इस बार रबी की फसल अच्छी होगी। किसानों को उम्मीद थी कि अगले पंद्रह दिन तक ऐसा ही मौसम रहा तो पौधे की ग्रोथ बढ़ जाएगी। लेकिन तीन दिन से लगातार निकल रही धूप ने किसानों की ¨चता बढ़ा दी है। कृषि वैज्ञानिकों का भी मानना है कि मौसम में जिस तरह का परिवर्तन हुआ है अगर बरकरार रहा तो निश्चित रूप से गेहूं की पैदावार पर असर पड़ेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन किसानों ने गेहूं की समय से बोआई कर दी थी उनकी फसल पर तो मौसम के करवट बदलने का कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन दिसंबर में बोआई करने वाले किसानों की फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा पैदावार भी घटेगी। प्रगतिशील किसान सकरन के हरिश्चंद्र, जंसार के बिरजू, टिकरा के भागीरथ के मुताबिक अगर अभी दस दिन और इसी तरह ठंड पड़ती तो गेहूं की फसल बहुत अच्छी होती लेकिन तीन दिन से मौसम जिस तरह से बदल रहा है उससे पछेती गेहूं की फसल का उत्पादन गिरने की संभावना बन गई है। जिला कृषि अधिकारी अतींद्र ¨सह ने कहा कि पछेती गेहूं बोने वाले किसान दवा का छिड़काव और समय से ¨सचाई कर उत्पादकता गिरने से रोक सकते हैं।


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