बाबा फरीद अहमद की स्मृति एवं शोकसभा का आयोजन
उन्नाव। बाबा फरीद अहमद की स्म्रति एवं शोकसभा
का आयोजन किया गया जिसमें हर साल की तरह गरीब असहाय पुरुष एवं महिलाओं को कम्बल
वितरण किये गए काय्र्रकम विशनू चंद्र मिश्र की अध्यक्षता में आरम्भ हुआ संचालन
अखिलेश तिवारी ने किया मुख्य अतिथि फ़ारूक़ अहमद एडवोकेट (हाईकोर्ट) रहे।
बतातें चलें
जनपद लखनऊ के नगर पंचायत मलिहाबाद में एक बहुत प्रसिद्ध मोहल्ला है जिसे सय्यदवाड़े
के नाम से जाना जाता है इसी महल्ले में एक प्रतिष्ठित एवं सामाजिक शख्सियत रहती थी
जिन्हें अब्दुल हमीद के नाम से जाना जाता था जो कि मलिहाबाद में कानूनगो के पद पर
रहते हुए भी अपने अच्छे कारनामों से जाने जाते थे और आपके पिता मीर अब्दुल रज़्ज़ाक
भी कानूनगो एवं कानूनगो गिरदावर के ओहदेदार पद से होकर रिटायर हुए अब्दुल हमीद के तीन
पुत्र एवं चार पुत्री थीं अब्दुल हमीद के लिए तो सभी पुत्र पुत्री प्यारे थे
परन्तु एक पुत्र बचपन से ही बड़े बुद्धिमान व सूझबूझ वाले लगते थे हमारे देश की एक
बड़ी प्रसिद्ध कहावत है कि उनका पुत्र बड़ा होनहार है कुछ इसी तरह से तो हम बात कर
रहें हैं स्वर्गीय बाबा फरीद अहमद के बारे में बाबा का जन्म लगभग 1922 में मलिहाबाद
के मोहल्ला सय्यादवाड़े में हुआ बाबा ने कुछ समय तक पढ़ाई मलिहाबाद में की उस के बाद
बाबा ने बड़ी समझदारी का सुबूत देते हुए हाईस्कूल की पढ़ाई कान्वेंट तालुकेदार लखनऊ
में की इंटर भी जुबली कालेज लखनऊ से किया उसके बाद बी एस सी करने के लिए अलीगढ़
मुस्लिम यूनिवर्सिटी का रुख किया पढ़ाई चल ही रही थी की 1942 में भारत छोड़ो
आंदोलन में मौलाना हशरत मोहनी के साथ देश छोड़ो आंदोलन में भाग लिया तथा 1944 में बंगाल
रेजिमेंट(मलेट्री) में ऑडिटर पद पर रहे परन्तु भारत बटवारे में बंगाल
रेजिमेंट(मलेट्री) पाकिस्तान चला गया जिसके कारण बाबा अपने ही जनपद उन्नाव के नगर
पंचायत सफीपुर में नायब तहसीलदार के पद पर हो गए लेकिन समाजिक सोच के चलते हुए
बाबा ने 1955
में नायब तहसीलदार पद से इस्तीफा दे दिया इस्तीफा देने के बाद मलिहाबाद के साथ साथ
कस्बा नेव्तनी आगए और समाज सेवा करने लगे भारतीय कमनिस्ट पार्टी के बैनर तले आकर
लोगों की मदद करने लगे बाबा अपने अच्छे स्वभाव एवं विचारों की वजह से जिले क्या
अनेक जिलों एवं प्रदेश में माने जाने लगे और लोगों के दिलों में एक मकाम बना लिया
जिसका नतीजा ये रहा 1958 में करीबी परिवार के ही लोग दुश्मन बन बैठे बाबा के ऊपर जानी हमला
कर दिया जिससे शरीर में बहुत चोटें आईं शासन ने विपछियों पर कड़ी कार्यवाई करते हुए
उन्हें जेल भेजा 1976
में बाबा ने नशबंदी व इमरजेंसी का जमकर विरोध किया जिसमें बाबा जेल गए और कई बार
किसानों के नुकसान सूखाग्रस्त फसलों की लड़ाई लड़ी किसानों की लड़ाई में भी जेल गए
पुत्र अफ़जल अहमद ने बताया बाबा ने हसनगंज नेव्तनी डामर मार्ग कराया नेव्तनी से
मोहन फरहदपुर मार्ग गलयरा बनवाया एक कहावत है जो इंसान जितने अच्छे ईमानदार होते
हैं उनके उतने दुश्मन होते हैं इसी के चलते बाबा को 1982 में लोगों ने
शहीद कर दिया।
बाबा के शहीद होने पर कम्युनिस्ट पार्टी ने पूरे प्रदेश में जमकर इस का विरोध किया। बाबा के स्वर्गवास के बाद विधायक भीखा लाल विधायक सजीवन लाल जेड अहमद राजेश्वर राव जैसी सख्सियत ने बाबा की बरसी (शोकसभा )का आरम्भ किया जो कि आज भी मनाया जाता है इस कार्यक्रम में राधेलाल रावत पूर्व विधायक शैलेन्द्र सदस्य जिलापंचायत हयात रसूल चेयरमैन मोहन बलवन्त सिंह शफी अहमद शिव सिंह ब्रजपाल फैसल मज़हर संजय जयसवाल
उपस्थित रहे।
बाबा के शहीद होने पर कम्युनिस्ट पार्टी ने पूरे प्रदेश में जमकर इस का विरोध किया। बाबा के स्वर्गवास के बाद विधायक भीखा लाल विधायक सजीवन लाल जेड अहमद राजेश्वर राव जैसी सख्सियत ने बाबा की बरसी (शोकसभा )का आरम्भ किया जो कि आज भी मनाया जाता है इस कार्यक्रम में राधेलाल रावत पूर्व विधायक शैलेन्द्र सदस्य जिलापंचायत हयात रसूल चेयरमैन मोहन बलवन्त सिंह शफी अहमद शिव सिंह ब्रजपाल फैसल मज़हर संजय जयसवाल
उपस्थित रहे।

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