Ad

style="width:640px;height:100px;" alt="ads" /> ads

Breaking News

उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ ने आयोजित की संगोष्ठी



उन्नाव। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ ने गुणवत्ता शिक्षा एक पहल के अंतर्गत शिक्षा संगोष्ठी जिला महामंत्री सौरव सिंह यादव की अध्यक्षता में संपन्न की। शिक्षा संगोष्ठी का संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश वर्मा ने किया।
सर्व प्रथम बैठक में मातृभाषा हिंदी विषय पर चर्चा की गई। प्रदेश कोषाध्यक्ष संजय कुमार कनोजिया ने कहा कि भारतीय संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है लेकिन अब तक हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं बन सकी यह चिंता और चिंतन का विषय है कि हिंदी हमारी मातृभाषा है फिर भी इससे हम सभी दूर क्यों भाग रहे हैं। इसके प्रमुख कारण.तरक्की के लिए अंग्रेजी भाषा को जानना नितांत आवश्यक है। यह हमारे समाज की गरीबी मानसिकता। इसका शिर्फ निवारण यह है कि सरकार विभिन्न विभागों में अंग्रेजी की बादशाहत को खत्म कर हिंदी को प्रथम अंग्रेजी को द्वितीय भाषा के रूप में कार्य करवाना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं में हिंदी माध्यम की पुस्तकों को भी प्रमाणिक माना जाए। भाषा हमारी संस्कृत की वाहक है प्रत्येक व्यक्ति को अपनी संस्कृति को बचाने का प्रयास अंतर्मन से करना ह। अपने छात्रों में यह संस्कार डालना है की तरक्की कितनी भी करो पर जब घर जाओ तो उसी भाषा में बोलो जो हमारी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा हो।
    निज भाषा उन्नति अह, सब उन्नति के मूल।

  बिन निज भाषा ज्ञान क, मिटे न हिय की शूल।।
शिक्षा संगोष्ठी में अन्य बिंदुओं पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ उपाध्यक्ष इमरान खान ने कहा कि शिक्षकों की निम्नलिखित समस्याओं का शीघ्र निवारण किया जाए जिससे शिक्षको का शोषण ना हो। माननीय उच्च न्यायालय के पर पारित आदेश दिनांक 8 अक्टूबर 2015 एवं 21 दिसंबर 2017 के अनुपालन में 2004 बैच के नियुक्त शिक्षकों की जीपीएफ कटौती शीघ्र कराई जाए।
जनपद में अर्धवार्षिक परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का भुगतान नहीं -किया गया है कई बार मांग करने के उपरांत भी शिक्षकों की समस्याओं का निस्तारण नहीं हुआ जो की खेद का विषय है। गैर शैक्षिक कार्यों में कार्य में जहां तक संभव हो सके शिक्षकों को न लगाया जाए तथा गैर शैक्षणिक कार्य में लगाने की स्थिति में प्रतिकर अवकाश का आदेश पारित किया जाए। मध्यान भोजन की कनवर्जन कास्ट की धनराशि पिछले 2 माह से तथा फल वितरण कि धनराशि पिछले 6 माह से प्राप्त नहीं हुई जिसके कारण शिक्षकों को एमडीएम तथा फल वितरण में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है स्थिति दयनीय है। रसोईया मानदेय विभाग द्वारा मार्च 2018 तक भुगतान करने की जानकारी दी गई किंतु अभी तक खातों में नहीं गई।
जनपद में 700 शिक्षकों की एनपीएस कटौती होने के उपरांत खातों में जमा नहीं हुई जिसका शीघ्र निस्तारण किया जाए। अप्रैल 2005 के बाद में शिक्षकों का प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कितनी धनराशि विभाग ने काटी व कितनी संबंधित शिक्षक के खाते में जमा की गई इसकी जानकारी दी जाए जिससे सभी शिक्षक अपने खातों से मिलान कर आश्वस्त हो सकें। वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) उन्नाव से मौखिक वार्ता में बताया गया था कि लेखा पर्ची सितंबर 2017 तक सभी शिक्षकों को दे दी जाएगी। किंतु 5 माह बीत जाने के उपरांत भी अब तक लेखा पर्ची नहीं मिली जो की अत्यंत खेद जनक स्थिति है। महंगाई अवशेष भुगतान बिल फरवरी माह तक सभी विकासखंडो से अवश्य लेखा कार्यालय में प्रस्तुत कर दिया जाए ताकि बजट की उपलब्धता के कारण किसी कारण इसी वित्तीय वर्ष में भुगतान हो सके।

No comments