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सांप्रदायिक सद्भाव और बादशाह खान पर व्याख्यान का आयोजन

उन्नाव। गांधी पुस्तकालय उन्नाव सभागार में आज रविवार के दिन भारत रत्न बादशाह खान अब्दुल खान की स्मृति में सांप्रदायिक सद्भाव और बात शाखा के विषय पर डॉ विमल द्वारा मुख्य व्याख्यान बहुत ही विचारोत्तेजक विमर्श के साथ संपन्न हुआ।
वर्धमान विश्वविद्यालय पश्चिमी बंगाल के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ विमल ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की महान विरासत को याद करते हुए बादशाह खान के विस्मरणीय योगादन पर प्रकाश डालते हुए उनकी जिंदगी के संघर्ष आजादी की लड़ाई में उनके योगदान व सांप्रदायिकता के खिलाफ उनके आंदोलन को याद किया।  उन्होंने राजनीतिक दलों को आगाह करते हुए कहा कि राष्ट्रीय भक्ति को राष्ट्रवाद में बदलने और धर्म को उसका आधार बनाने के खतरों की ओर आगाह किया तथा उन्होने  जनता को सचेत रहने का आह्वान किया। डॉ विमल ने मानवीय एकता के लिए बौद्धिक छात्रों नौजवानों व शिक्षकों की एकजुटता पर बल दिया। व्याख्यान के प्रारंभ में इंसानी बिरादरी के अरविंद कुमार कमल ने उनके योगदान की चर्चा की। जिसकी स्थापना बादशाह खान ने 70 के दशक में की थी। शहर में सांप्रदायिक सद्भाव के लिए जन एकता मुहिम के साथ इंसानी बिरादरी के लिए बादशाह खान की स्मृति को प्रेरक बता

व्याख्यान देते डॉ विमल

या। सर्वोदय मंडल के जिलाध्यक्ष राम शंकर ने बादशाह को गांधी का सच्चा अनुयाई बताया। नौजवान सभा कें अखिलेश ने राजनीतिक दलों में जाति धर्म की कट्टरता की जमकर आलोचना की।
आयोजन के अंत में डॉक्टर डॉक्टर विमल कें बीच उपस्थित श्रोताओं के द्वारा प्रश्नोत्तर का सत्र भी चला। आयोजन में मुख्य वक्ता डॉ विमल का स्वागत गांधी पुस्तकालय के मंत्री अतुल मिश्र ने व अध्यक्ष गौसिया खान का स्वागत राम शंकर ने बैच लगाकर किया। आयोजन का संचालन जन एकता मुहिम के संयोजक गिरजेश कुमार ने किया। वहीं धन्यवाद ज्ञापन साथी सुशील ने किया।  आयोजन में जनपद के सभी प्रमुख नागरिक साहित्यकार लेखक व जन कर्मी मौजूद रहे। जिनमें जिनमें संजीव, आभा माथुर ,रामकुमार यादव, जयनारायण शुक्ला, बिदंा भाई, बृजमोहन, मनीष, रघुराज मगन, शैलेंद्र उपाध्याय, नंदकुमार पवन, राकेश सिंह, अमरेंद्र शंकर, ठाकुर प्रसाद, नसीर अहमद, मिस्बाहउद्दीन, मजहर हुसैन, डॉ आशु अवधेश सिंह आदि प्रमुख थे।

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