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सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की 121वीं जयंती पर विचार गोष्ठी


उन्नाव। हिंदी के कालजई रचनाकार महाप्राण पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की 121वी जयंती पर निराला महाप्राण महाविद्यालय में निराला शिक्षा निधि द्वारा विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों ,राजनेताओं ने पहुंचकर निराला को श्रद्धासुमन अर्पित किये।

महाप्राण निराला महाविद्यालय ओंसिया, बीघापुर के परिसर में निराला निलयम में लगी महाप्राण की प्रतिमा पर राजनेताओं, साहित्यकारों ने पहुंचकर माल्यार्पण कर उनके व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डाला गया। आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि निराला के बिना हिंदी साहित्य अपूर्ण सा प्रतीत होगा, उनकी साहित्य सर्जना सहज  अभिव्यक्ति है,। उन्होंने निराला के वंसज राजकुमार त्रिपाठी की पत्नी रेखा को, जो घर की दीवार गिरने से घायल हो गईं थीं, उनके इलाज के लिए 2लाख व  आवास के लिए 3लाख रु. सरकार से दिलाने की भी बात कही। बांगरमऊ विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने कहा कि साहित्यकारों, रचनाकारों ,मनीषियों ने अपनी कलम के माध्यम से राष्ट्र को जागृत करने का काम किया है । राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने भी सत्ता को अपनी कलम के माध्यम से आगाह किया। उत्तर प्रदेश की सरकार निराला की जन्मस्थली को अद्वितीय बनाने के लिए कृतसंकल्पित है ।उन्होंने कहा कि व्यवस्था को सुब्यवस्थित करके समाज को बांटने का काम न कर जोड़ने का काम हम सब मिलकर करें ,जिससे सबका साथ सबका विकास की अवधारणा हकीकत में बदल सके। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महर्षि दयानंद डिग्री कॉलेज बछरावां के प्राचार्य डॉक्टर राम नरेश ने कहा निराला का धर्म वेदांत से सहमत है निराला की रचनाएं वर्तमान कवियों की जहाँ प्रेरणा स्रोत हैं वहीँ पूर्व के साहित्यकारों और कवियों की प्रेरणा स्रोत है निराला का साहित्य प्रयोग से ओतप्रोत है ,उनका साहित्य दलित विमर्श, नारी विमर्श, श्रम विमर्श आदि आदि मैं भी जीवंतता के साथ उपस्थित है उन्होंने कहा कि गया प्रसाद शुक्ल स्नेही ने उनके बारे में कहा कि कवि हैं,सुकवि है तो महाकवि निराला है। निराला अतुलनीय है। सहायक सेनानायक पीएसी लखनऊ में तैनात वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राजीव दीक्षित ने कहा कि उनके व्यक्तित्व कृतित्व का अध्ययन करने के बाद यही कहा जा सकता है कि उनका निराला नाम पूरी तरह सार्थक है निराला सुंदर मनोभावों के कवि हैं। कार्यक्रम में प्रमुख रुप से नरेंद्र विक्रम सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य बी डी सिंह ,बाबू गंगा प्रसाद यादव , निर्भय सिंह लाला,  ब्रज किशोर वर्मा ,नगर पंचायत अध्यक्ष बीघापुर गोविंद नारायण शुक्ला, चंद्र माधव त्रिवेदी, रमाशंकर दीक्षित, ब्रज कुमार अवस्थी ,संतोष बाजपेई,बोध  शंकर दीक्षित, अरुण दीक्षित, नरेंद्र आनंद , शैलजाशरण शुक्ला निराला शिक्षा निधि के संस्थापक कमला शंकर अवस्थी ,निराला डिग्री कॉलेज के प्रबंधक नीरज अवस्थी,कुन्नू महराज आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मनोहरा स्मृति  महिला महाविद्यालय के प्रबंधक गौरव अवस्थी ने किया।

निराला शिक्षा निधि द्वारा निराला जयंती के अवसर पर समाज में विशिष्ट कार्य करने वालों को अंगवस्त्र प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया ।बीघापुर विकासखंड में  यूपी बोर्ड में 10 वाँ स्थान लाने वाली छात्रा पूर्णिमा सिंह व प्रिया पांडेय को भी प्रोत्साहन राशि व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया अन्य लोगों में राम शरण सिंह रमेश चंद तिवारी, राजेंद्र अवस्थी , कृषि के क्षेत्र में इंद्रराज पटेल, प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक डॉ. आशीष दीक्षित को भी समिति द्वारा सम्मानित किया गया।

कब्र से भी लिंक हो ही जायेगा आधार नम्बर- गजेन्द्र प्रियांशु
 कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित 
निराला की जयंती पर हुआ काव्य समारोह

निराला शिक्षा निधि द्वारा संचालित महाप्राण निराला महाविद्यालय में निराला की 121वीं जयन्ती पर साहित्यकार, कवियो ने अपनी रचनाओ के माध्यम से हिन्दी के कालजयी रचनाकार निराला को याद किया।

काव्य समारोह का शुभारम्भ बाराबंकी से पधारे गजेन्द्र प्रियांशु की वाणी वंदना से हुआ- गहन तम छा रहा हो अधेरा छा की पंक्ति कह श्रोताओ को गुदगुदानें पर मजबूर कर दिया। वहीं इटावा से पधारे राजीव राज ने पढ़ा- सूर के समान दृष्टि अन्तर की पायी पायी, रूढ़िवादिता के प्राति क्रांति थी कबीर सी काव्य पाठ किया। लखनऊ से पधारे अमित अनपढ़ ने लोगो को लोटपोट किया। उन्होने पढ़ा-करते गुनाह है मगर कबूलते नहीं/ जिस डाल पर खतरा हो उस डाल पर हैं झूलते नहीं/ मां बाप की नसीहतो को भूल गये हम/ पर उनकी वसीयत को भूलते नहीं। लखनऊ से ही पधारे हास्य व्यंग में महारत रखने वाले पंकज प्रसून ने पढ़ा-हमारे देश में दो तरह के गांधीवादी पाये जाते हैं,/ पहले जो महात्मा गांधी मार्ग पर चलते हैं और दूसरे जो महात्मा गांधी मार्ग बनवाते हैं। /मैने मार्ग बनवाने वाले से पूछा से कैसा गांधी मार्ग है,/ वहां सीवर खुला है पानी बह रहा है उस पर रोडे ही रोडे हैं, /वह बोले गांधी के पथ पर चलना आसान थोडे है। गीतकार गजेन्द्र प्रियांशु ने पुनः अपनी रचना पढ़ते हुए लोगो को रोमांचित कर दिया- आत्माओ के मिलन का क्या भरोसा हम करें अब,/ कब्र से भी लिंक हो ही जायेगा आधार नम्बर।

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