कूडे के ढेर में भविष्य तलाश रहे नौनिहाल
thepenpalnews.in
उन्नाव - सरकारें आई प्रयास हुए लेकिन नतीजा शून्य ही रहा, सूबे की वर्तमान सरकार भी प्रयास करती दिख रही है, लेकिन जनपद प्रशासन के सुस्त रवैये के कारण बदलाव नजर नहीं आ रहा है|
नैनिहालों का भविष्य संवारने की बड़े मंचो से बड़ी - बड़ी बाते होती है, योजनाए बनाई जाती है करोडो का सरकारी धन व्यय होता है लेकिन नैनिहालों की स्थिति बद से बत्तर होती जा रही है| जनपद के नैनिहाल पेट पालने के लिए होटलों में ढाबों पर काम करते हुए, गलियों में कूड़ा बिनते हुए आसनी से मिल जायेंगे जिनको भविष्य की परवाह नहीं होगी अगर कुछ परवाह होगी तो सिर्फ इतनी कि शाम को दो निवाले कैसे मिलेंगे जिससे अपने पेट की भूख शांत कर सकेंगे | सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओ को ये बच्चे शायद दिखाई ही नहीं देते है और तो और जब जिम्मेदार अधिकारी होटलो में पहुँचते ही छोटू पानी ले आना कहते है और ये नैनिहाल उस समय भी उन्हें नहीं दिखाई देते है इससे दुखद शायद कुछ और नहीं हो सकता है इतना ही नहीं राइट टू एजुकेशन और बाल श्रम निषेध जैसे लाइने आपको कई जगह लिखी हुई दिख जाएंगी लेकिन पालन होता हुआ कंही नज़र नहीं आएगा ऐसे में एक ओर जंहा जनपद के गरीब नैनिहालों का भविष्य अंधकार में डूबता हुआ नज़र आ रहा है तो वंही दूसरी ओर शासन के जिम्मेदर लोगों का भविष्य सुनहरा होता नज़र आ रहा है क्योंकि इन बच्चों के उत्थान के लिए आने वाले सरकारी धन का इन लोगों के बीच बंदरबांट जो हो रहा है |
सरकारी निष्क्रियता के कारण जनपद के सैकड़ो मासूमों का बचपन और भविष्य कूड़े के ढेर और होटल,ढाबों की मेंजो पर दम
तोड़ रहा है |
...... रिपोर्ट - सनी सिंह [ edited by - yogendra yadav]
उन्नाव - सरकारें आई प्रयास हुए लेकिन नतीजा शून्य ही रहा, सूबे की वर्तमान सरकार भी प्रयास करती दिख रही है, लेकिन जनपद प्रशासन के सुस्त रवैये के कारण बदलाव नजर नहीं आ रहा है|
नैनिहालों का भविष्य संवारने की बड़े मंचो से बड़ी - बड़ी बाते होती है, योजनाए बनाई जाती है करोडो का सरकारी धन व्यय होता है लेकिन नैनिहालों की स्थिति बद से बत्तर होती जा रही है| जनपद के नैनिहाल पेट पालने के लिए होटलों में ढाबों पर काम करते हुए, गलियों में कूड़ा बिनते हुए आसनी से मिल जायेंगे जिनको भविष्य की परवाह नहीं होगी अगर कुछ परवाह होगी तो सिर्फ इतनी कि शाम को दो निवाले कैसे मिलेंगे जिससे अपने पेट की भूख शांत कर सकेंगे | सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओ को ये बच्चे शायद दिखाई ही नहीं देते है और तो और जब जिम्मेदार अधिकारी होटलो में पहुँचते ही छोटू पानी ले आना कहते है और ये नैनिहाल उस समय भी उन्हें नहीं दिखाई देते है इससे दुखद शायद कुछ और नहीं हो सकता है इतना ही नहीं राइट टू एजुकेशन और बाल श्रम निषेध जैसे लाइने आपको कई जगह लिखी हुई दिख जाएंगी लेकिन पालन होता हुआ कंही नज़र नहीं आएगा ऐसे में एक ओर जंहा जनपद के गरीब नैनिहालों का भविष्य अंधकार में डूबता हुआ नज़र आ रहा है तो वंही दूसरी ओर शासन के जिम्मेदर लोगों का भविष्य सुनहरा होता नज़र आ रहा है क्योंकि इन बच्चों के उत्थान के लिए आने वाले सरकारी धन का इन लोगों के बीच बंदरबांट जो हो रहा है |
सरकारी निष्क्रियता के कारण जनपद के सैकड़ो मासूमों का बचपन और भविष्य कूड़े के ढेर और होटल,ढाबों की मेंजो पर दम
तोड़ रहा है |
...... रिपोर्ट - सनी सिंह [ edited by - yogendra yadav]

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