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रोडवेजकर्मियों के अडि़यल रवैये के चलते आम यात्रियों में बढ़ रहा रोष

उन्नाव। शहर से चलने वाली रोडवेज बस सेवाएं अधीनस्थ कर्मचारियों के रवैयें के चलते दिन प्रतिदिन खराब होती चली जा रही है। इन बसों के यात्रा करने वाले आम यात्रियो के साथ रोडवेज बस को चलाने वाले कर्मचारियों के अडि़यल रवैए के चलते यात्रियों ने रोडवेज से दूरी बनानी शुरू कर दी है।
वहीं रोजाना प्राइवेट वाहनो की तुलना में
रोडवेज बसों के किराये में बढ़ोत्तरि भी आम यात्रियो को उससे दूर कर रहा है। जिस तरह रोडवेज का किराया बढ़ा है। उसकी तुलना में सुविधा नाम मात्र भी बढ़ने के बजाए उल्टे घटी है। जिसके चलते आम यात्री परेशानियाॅ घटने का नाम भी नहीं ले रही हैं, यदि सचांलन की बात की जाए तो रोडवेज बसों का संचालन इतना खराब है कि कोई यात्री समय के आधार पर कभी भी रोडवेज बस पकड़ ही नहीं सकता। बताते चले कोई भी बस समय से कितने पहले व कब कैंसिल होगी। यह जानकारी इंक्वायरी में बैठा कर्मचारी भी नहीं दे सकता। जिससे चन्द्रशेखर आजाद के नाम से जाना जाने वाला रोडवेवज बस अड्डा वास्तव में नियम कायदो से आजाद दिखता हैं वहीं इस बावत किसी रोडवेज के कर्मचारी से बात की जाती है तब वह अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर प्रकरण डाल या अपने आलाधिकारियों की जवाबदेही बता कर पल्ला झाड़ लेता है।
संचालन अनियमित और स्पष्ट नहीं 
रोडवेज बस अड्डे में एक बड़े क्षेत्र में चलने वाली रोडवेज बसों के सचांलन को लेकर किसी प्रकार की कोई जबावदेही नहीं दिखती है। किसी भी गाड़ी को कुछ खाश लोगों की सहुलियत को ध्यान में रख आम यात्रियो की सुविधाओ को ताक पर रख कर समय से काफी पहले छोड़ना तो रोडवेज बस संचालको के बाए हाथ का काम है। वहीं रोडवेज कर्मी इसको लेकर किसी प्रकार की गलती होना ही नहीं मानते। उनके अनुसार रोडवेज बसों को समय से काफी पहले छोड़ा जा सकता हैं। और इसमें बुराई भी क्या है। शायद समय के साथ चलने वालें यात्रियों के साथ दुव्र्यवहार करने वाले रोडवेज कर्मी इस बात को अभी समझ पाने में असमर्थ दिख रहें है। यदि संचालन करने वाले टाइट टेबल की देखी जाए तो पुरवा मौरावां को छूटने वाली बस शाम को छः बजे के बजाए सांढ़े पाॅच से पौने छः कें बीच किसी भी समय छूट सकती है। वहीं साढ़े छः बजे वाली बस का भी कुछ यही आलम है। उसके छूटने के समय को काफी पहले कर किसी भी समय छोड़ना संचालको के लिए कोई कठिन नही लगता है।

क्या कहते है आम यात्री
मौरावां के पठई गांव के रहने वाले राजेष पांडे के अनुसार गाडि़यों के छूटने के तय सीमा समय से पहले या बाद में छोड़ने के चलते आम यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं जिस समय यात्री यह मान कर स्टेषन आता है कि वह बस पकड़ लेगा। उस समय स्टेषन पर आ कर उसे पता चलता है कि उस समय वाली बस या तो अभी छूट गई है। या फिर वह देर से आ रही हैं वहीं यदि यात्री समय से आ जाए और बस न मिले तो इंक्वायरी आफिस के कर्मी उसे हड़काते हुए समय से पहले आने को कह सारी गलती उसके ही षिर पर मढ़ देते हैं। वहीं रजत शुक्ला के अनुसार रोडवेज स्टेषन पर स्टेषन मास्टर के न होने के चलते भी यह समस्या बढ़ती जा रही है। वहीं उन्होने षिकायती लहजे मे कहा कि आलाअधिकारियों को कम से कम स्टेषन या स्टेषन के पास ही अपना आफिस बनाना चाहिए। ताकि आम यात्री उनसे अपनी समस्या तो बता सके।  ऊंचगांव के उमेश के अनुसार रोडवेज कर्मियों के ओक्षे रवैये के चलते आम यात्री बेहद परेशान होकर निजी या प्राइवेट साधनों का तरफ देखने लगा है वही यदि किसी रोडवेज संचालक से बात की जाए तो वह सीधे मुंह बात ना कर सीधे सीधे कह देता है कि आप समय से पहले आएं हम किसी भी समय किसी भी गाड़ी को छोड़ सकते हैं इसमें हमारी कोई गलती नहीं। 
बिछिया की रजनी कुमारी के अनुसार रोडवेज कर्मियो से उसने इस बावत कई बार षिकायत की तो वे उल्टे उस पर बरस पड़े। उसके अनुसार वे इस बात को लेकर अपनी गलती स्वीकार करने के लिए तैयार ही नहीं थे कि समय से पहले गाड़ी छोड़ देने से आम यात्री परेशान भी होता है। वे इस बात के लिए बेहद लापरवाह है कि इस इस से कितने यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ जाती है उनको लगता है कि उन यात्रियों को आधा घंटा से ज्यादा वक्त लेकर स्टेशन पर आना चाहिए। वहीं रोडवेज के एक कर्मी निखिल से इस समस्या को लेकर बात करनी चाही तो उसने संवाददाता को उल्टे हड़काते हुए कहा कि वह सरकारी कर्मचारी है। वह जिस समय चाहेगा रोडवेज रवाना करवा सकता है। रोडवेज के संचालन को लेकर अक्सर परेषान होने वालो में तौरा के आषीष, देवकुमार दुर्गेष अमित समेत कई लोगों ने अपनी बाते रखी।

बस नाम को रोडवेज बस अड्डा
चन्द्रषेखर आजाद के नाम से संचालित रोडवेज बस अड्डा बस नाम का ही रह गया है। कारण साफ है कि यहाॅ के नाम से संचालित होने वाली एक आध रोडवेज बसों को छोड़ बसें  स्टेशन तक झांकने नहीं आती। जबकि शहर से निकलते समय हरदोई पुल से स्टेशन मात्र दो मीटर ही  दूर रह जाता है। वहीं लखनऊ से कानपुर के बीच निकलने वाली बसें राजमार्ग से ही निकल जाती है। रोडवेज के सेवानिवत्तृ कर्मियांे के अनुसार लखनऊ से कानपुर के बीच संचालित बसों को शहर के अंदर आने से छूट मात्र मुख्य मागों में जाम के चलते दी गई थी। अब जबकि सड़क का चैड़ी करण भी  हो चुका है ऐसे में बसों को अंदर तो आना ही चाहिए। इसी तरह लखनऊ, कानपुर से हरदोई आने-जाने वाली बसें शहर के स्टेशन पर आना गंवारा नहीं समझती। जबकि इन रूटों पर एक बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है।

आम यात्रियों को उठानी पड़ती है भारी मुसीबत 
रोडवेज बस स्टेषन पर बसों के न आने के चलते आम यात्रियों को एक लंबी यात्रा कर उन बसों को पकड़ने के लिए करनी पड़ती है। वहीं आम सड़क पर रोडवेज बसों के रुकने से भारी जाम के साथ रोड एक्सीडेंट की भी संभावना भी बढ़ जाती है। जिनमें करीब एक वर्ष पूर्व शहर के आवास विकास बाइपास के निकट एक भीषड़ दुर्घटना जिसमें एक निजी बस को कानपुर से लखनऊ जा रही रोडवेज बस ने टक्कर मार दिया था। जिसमें काफी यात्री गंभीर रूप से घायल हुए थे। वहीं हरदोई पुल पर भी रोडवेज बसों के रूकने के चलते जाम की नौबत आ जाती है। 

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