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मृतकों के शव देखने गए परिजनों को बंद कर दिया पुलिस ने

उन्नाव। मृतकों के परिजनों के विलाप से शवविच्छेदन गृह दहल उठा। तीनों मृतकों की विधवाओं के परिजनों से  पूछे जाने वाले सवाल से आसपास से गुजर रहे लोगों के हृदय कांप उठे। वही मृतकों के नौनिहालों के संशय भरे चेहरे उठते द्रवित करने देने वाले देख हर कोई उनसे नजरें चुराता मिला।
जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद शुक्रवार की देर रात चकलवंशी चौराहे पर कोई दो पहिया बाइक सवार तीन युवकों की मौत के बाद परिजन इकट्ठे हुए थे। बताते चलें विनोद पुत्र  व जुगल किशोर पुत्र मोतीलाल कल्लू पुत्र कैलाश की बहन का तिलक चढ़ाने बम्हना गए थे। देर रात वे वहीं से लौट रहे थे। बाइक विनोद चला रहा था इसी बीच चकलवंशी चौराहे के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से तीनों की दर्दनाक मौत हो गई प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कल्लू के पेट को चीरती हुई एक ऐंगल घुस गई थी। पीछे से आ रहे लड़की के पिता कैलाश ने हादसे को देख अपनी गाड़ी रुकवाई तथा परिजनों को सूचना दी। जिस पर थोड़ी ही देर में सड़क पर मजमा लग गया इसी बीच राहगीरों की सूचना पर माखी थाना इंचार्ज अशोक सिंह भदौरिया मौके पर पहुंच गए। मृतकों के परिजनों को सांत्वना देने की बजाय वर्दी का रौब दिखा उन्होंने भानु पुत्र अशर्फी भारत व मनवा को  पकड़ कारागार में डाल दिया। मृतकों के परिजन सफीपुर विधायक से लेकर ना जाने कितने गणमान्य की दहलीज न्याय की बात कर शनिवार की दोपहर तक निर्दोष बंद परिजनों को छुड़वा सके। परिजन जब छूट के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तब उन्हें पता चला कि मृतक अज्ञात तौर पर पोस्टमार्टम हाउस में रखे हुए हैं दुखद बात तो यह है कि पुलिसकर्मियों ने आखिर जानबूझकर यह कदम क्यों उठाया। इस  सवाल का जवाब या तो थाना माखी के इंचार्ज अशोक सिंह भदौरिया ही दे सकते हैं या फिर न्याय व्यवस्था।

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