अस्पताल में नहीं मिलते चिकित्सक
उन्नाव। प्रदेश सरकार के फरमान के बावजूद चिकित्सक सुधारने का नाम नहीं लें रहे हैं। जिसके चलते आम जन को भारी मुसीबतों का सामना करना पद रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रो की स्थति देखि जाए तो बहुत अच्छी नहीं है। हाइवे में मौजूद सीएचसी
के जच्चा-बच्चा वार्ड में रात को महिला डाक्टर ड्यूटी होने के बावजूद मौके पर कभी नहीं मिलती। जिस
वजह से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ती है। रात को अगर कोई गंभीर मरीज अा
जाए तो अस्पताल में उपचार के लिए तरसना पड़ता है।
हाइवे स्थित सीएचसी का जच्चा बच्चा वार्ड में न तो डाक्टर तैनात रहते हैं अौर न ही दवाएं अच्छी तरीके से मिलती हैं। डॉक्टरों की गैरमौजूदगी से सीएचसी में आने वाली महिलाओं का प्रसव नर्स व दाई के भरोसे निपटाने को मजबूर होना पड़ रहा है। यहां पर व्याप्त कमियों की वजह से मरीजों को तमाम परेशानी झेलनी पड़ती है। पैसा न देने पर इन्हें तमाम कमियां होने की बात कहकर बेवजह सीएचसी से अन्य अस्पतालों में रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जाता है। इस बाबत सीएचसी अधीक्षक वीके गुप्ता का कहना है कि महिला डाक्टर की ड्यूटी लगाई जाती है लेकिन सुविधा न होने की वजह से वह नहीं रुकती हैं।
14 जून को रुपया न देने की बात कहते हुए महिला के परिजनों ने प्रसव न कर उसे रेफर करने का अरोप लगाकर हंगामा काटा था। इनका कहना था कि दर्द से तड़पती महिला को एबुलेंस की सेवा तक नसीब नहीं हुई। बाइक से सीएचसी से दूसरे अस्पताल ले जाते वक्त प्रसव गेट पर होने के दौरान बच्चे ने दम तोड़ दिया था। सीएमओ से शिकायत कर मामले में कठोर कार्रवाई करने की मांग भी उठाई थी। जिस पर तत्कालीन सीएमओ ने चार लोगों से स्पष्टीकरण तलब किया था और पूर्व अधीक्षक डॉ. विक्रम को महिला डॉक्टरों की रात को तैनाती करने का निर्देश दिया था।
हाइवे स्थित सीएचसी का जच्चा बच्चा वार्ड में न तो डाक्टर तैनात रहते हैं अौर न ही दवाएं अच्छी तरीके से मिलती हैं। डॉक्टरों की गैरमौजूदगी से सीएचसी में आने वाली महिलाओं का प्रसव नर्स व दाई के भरोसे निपटाने को मजबूर होना पड़ रहा है। यहां पर व्याप्त कमियों की वजह से मरीजों को तमाम परेशानी झेलनी पड़ती है। पैसा न देने पर इन्हें तमाम कमियां होने की बात कहकर बेवजह सीएचसी से अन्य अस्पतालों में रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जाता है। इस बाबत सीएचसी अधीक्षक वीके गुप्ता का कहना है कि महिला डाक्टर की ड्यूटी लगाई जाती है लेकिन सुविधा न होने की वजह से वह नहीं रुकती हैं।
14 जून को रुपया न देने की बात कहते हुए महिला के परिजनों ने प्रसव न कर उसे रेफर करने का अरोप लगाकर हंगामा काटा था। इनका कहना था कि दर्द से तड़पती महिला को एबुलेंस की सेवा तक नसीब नहीं हुई। बाइक से सीएचसी से दूसरे अस्पताल ले जाते वक्त प्रसव गेट पर होने के दौरान बच्चे ने दम तोड़ दिया था। सीएमओ से शिकायत कर मामले में कठोर कार्रवाई करने की मांग भी उठाई थी। जिस पर तत्कालीन सीएमओ ने चार लोगों से स्पष्टीकरण तलब किया था और पूर्व अधीक्षक डॉ. विक्रम को महिला डॉक्टरों की रात को तैनाती करने का निर्देश दिया था।

No comments