मृत शव के इलाज के लिए नर्सिंग होम प्रबंधन ने माँगी मोटी रकम
उन्नाव। सदर कोतवाली क्षेत्र के अन्तर्गत नहर के पास शेख पुर नरी स्थित शुभी नसिंग होंम में एक महिला की मौत हो गई। जिस पर परिजनों ने हगांमा काटा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले की तहरीर कर महिला के शव को कब्जे में ले पोस्टमार्टम के लिए पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया।
प्राप्त
जानकारी के अनुसार श्याम मूर्ति पत्नी मनोज निवासी रसूलाबाद बीते दिवस
शुक्रवार की शाम करीब नौ बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज में
पुत्री को जन्म दिया। उसके बाद श्याममूर्ति की हालत नाजुक देख चिकित्सक ने
जिला अस्पताल को रेफर कर दिया। जहाॅ इलाज के दौरान चिकित्सकों ने महिला को
कानपुर रेफर कर दिया।
महिला के पिता चोखे लाल ने बताया कि जिला
अस्पताल परिसर में एक अज्ञात व्यक्ति ने एबुलेंस सख्या यूपी 35 टी 8636 के
चालक सत्येंन्द्र को बुलाया। जिसके बाद एबुलेंस चालक सत्येंन्द्र ने गंभीर
अवस्था में जिला अस्पताल में पड़ी महिला को व परिजनों को शुभी अस्पताल ले कर
आ गया। जहाॅ पर चिकित्सकों ने तुरन्त बीस हजार रूपए जमा करा कर इलाज चालू
कर दिया। परंतु इलाज के दौरान कोई लाभ न होता देख, परिजनों ने महिला को
अन्य अस्पताल ले जाने की बात अस्पताल प्रशासन से की। लेकिन चिकित्सकों ने
कहीं और ले जाने पर महिला की जान को खतरे में डाल देने की बात कह परिजनों
को धमकाया। सुबह करीब नौ बजे महिला श्याममूर्ति की इलाज के दौरान हुई
लापरवाही के चलते मौत हो गई। जिस के बाद मृतका के ससुर रामऔतार व अन्य ने
वहाॅ पर हंगामा करना शुरू कर दिया। जिस पर सूचना मिलने पर घटना स्थल पर
पुलिस पहुंच कर शव को कब्जे में कर लिया। तथा शव विच्छेदन के लिए
पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। बवाल बढ़ता देख जिलाधिकारी के आदेश के बाद मौके
पर पहुँची उप जिलाधिकारी मेघा रूपम व उप जिलाधिकारी मनीष बसंल ने परिजनो
को समझाकर मामले को शात कराया। परिजनों ने पोस्टमार्टम हाउस में बताया कि
उनकी एफआईआर की कापी भी गायब कर ली गई है। जिस पर वे काफी आक्रोशित दिखे।
वहीं महिला की पोस्टमार्टमें के दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई। जहाॅ
उपजिलाधिकारी मेघारूपम ने मामले में दोष पाये जाने पर दोषी को दंडित करने
की बात कही।
दलालो की सक्रियता जिला अस्पताल परिसर में बढ़ी
संयुक्त
जिला चिकित्सालय के दोनों अनुभागों में दलालों की सक्रियता बराबर है।
पुरुष अस्पताल में ओपीडी के समय तक ही दलालों का बोलबाला रहता है, जबकि
महिला अस्पताल में तो दिनरात दलाल डेरा जमाए रहते हैं। रेफर के कागज बनने
से पहले ही उन्हें इसकी जानकारी हो जाती है। कमीशन के फेर में वह
तीमारदारों को पटा कर नर्सिंगहोम पहुंचा देते हैं। प्रशासन ने दलालों को
निशाने पर लिया है। एसडीएम ने स्वास्थ्य कर्मियों और दलालों के कनेक्शन की
भी जांच शुरू कर दी है।
संयुक्त जिला अस्पताल में नर्सिंगहोमों
के लिए कमीशन पर काम करने वाले दलालों की लंबी चैड़ी फौज सक्रिय रहती है।
पुरुष अस्पताल की ओपीडी से लेकर महिला अस्पताल के प्रसव कक्ष तक दलालों का
बेखौफ आवागमन रहता है। यह हाल भी तब है जब दोनों ही अस्पतालों में सीसी
टीवी कैमरा लगे हैं। जानकारों की माने तो ओपीडी के समय दलाल लाबी से लेकर
अल्ट्रासाउंड कक्ष के आसपास लगे रहते हैं। उसके बाद प्रसव कक्ष के
मुख्यद्वार पर डेरा जमा लेते हैं। प्रसव कक्ष के आसपास महिला दलाल ही
सक्रिय रहते हैं। वह तीमारदार बता वहां भर्ती प्रसूताओं के तीमारदारों के
बीच नजदीकी बनाए रहते हैं। अस्पताल में लापरवाही और डाक्टरों द्वारा कोई
सुनवाई न होने के किस्से बता तीमारदारों में खौफ बनाती हैं। जैसे ही उन्हें
मरीज के प्रसव में देरी और रेफर करने की जानकारी उन्हें पहले ही मिल जाती
है। बस वह तीमारदारों को बरगलाकर नर्सिंगहोम पहुंचा मोटा कमीशन लेते हैं।
ऐसा ही श्याममूर्ति को महिला अस्पताल से नर्सिंगहोम पहुंचाने के मामले में
जाहिरा तौर पर हुआ। जिसमें एंबुलेंस चालक का नाम सामने आया है, लेकिन कुछ
स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि महिला दलाल की मौजूदगी थी उसी ने
प्राइवेट एंबुलेंस बुलवाई। एसडीएम सदर ने दलालों व स्वास्थ्य कर्मियों में
आपस में क्या कनेक्शन है इसकी भी जांच शुरू कर दी है।
शुभी नर्सिंगहोम के साथ विवादों का है पुराना नाता
शुभी नर्सिंगहोम में दो माह के अंदर तीसरी बार हंगामा हुआ है। कुछ दिन पूर्व जिला अस्पताल से एक रोगी को लाकर अधिक पैसा लेने तो इसके पूर्व एक महिला की मौत को लेकर इसी नर्सिंगहोम में हंगामा हो चुका है। हर बार जांच के नाम ऐसे मामले दफन कर दिए जाते हैं।
शुभी नर्सिंगहोम में दो माह के अंदर तीसरी बार हंगामा हुआ है। कुछ दिन पूर्व जिला अस्पताल से एक रोगी को लाकर अधिक पैसा लेने तो इसके पूर्व एक महिला की मौत को लेकर इसी नर्सिंगहोम में हंगामा हो चुका है। हर बार जांच के नाम ऐसे मामले दफन कर दिए जाते हैं।
बीते माह लोकनगर जुराखन खेड़ा के
एक मरीज को भर्ती कर मोटी रकम वसूलने और पैसा न जमा करने पर चैबीस घंटे तक
बिना इलाज के मरीज को बंधक बनाए रखने को लेकर परिजनों ने हंगामा किया था।
मामले की डीएम से शिकायत की गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच करने
पहुंचे, लेकिन जांच में सब कुछ दब गया। इसके पूर्व इसी तरह एक महिला की मौत
को लेकर हंगामा हुआ था। उस समय भी जांच करने का आदेश दिया गया था लेकिन
कोई कारर्वाई नहीं की गई। नर्सिंगहोम के नोडल अधिकारी डा. एसीएमओ डा. तन्मय
कक्कड़ ने कहा कि पूर्व के मामलों की मुझे जानकारी नहीं है इस मामले में
मुकदमा दर्ज होने के बाद एसडीएम की रिपोर्ट का इंतजार है। एसडीएम की
रिपोर्ट में दोष मिलने के बाद नर्सिंगहोम का लाइसेंस निरस्त कर सील किया
जाएगा।



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