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अब आत्महत्या के बाद ही होगा,गन्ने का बकाया भुगतान



NEWS DESK - चीनी मिलों के अड़ियल रवैये और सरकारी अनदेखी के कारण अब तो यही लगता है कि आत्महत्या के बाद ही किसानों  को गन्ना  बकाये का भुगतान हो पायेगा, प्राप्त जानकारी के अनुसार बागपत जिले में 32 साल के गन्ना किसान राहुल ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली। राहुल की छोटी बहन को कैंसर था।  डॉ. ने ऑपरेशन कराने के लिए कहा था।  घर में नगद पैसा नहीं था। तीन लाख रुपये चीनी मिल पर बकाया थे। वो भी वक्त पर नहीं मिले। राहुल की आत्महत्या ने प्रदेश के गन्ना किसानों के गुस्से की आग को भड़का दिया। भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों ने जगह जगह प्रदर्शन किए।  अधिकारी राहुल का मिल पर बकाया पैसा लेकर पहुंच गए। लेकिन राहुल के बड़े भाई ने ये कहकर पैसा लेने से इंकार कर दिया कि क्या जो मरेगा उसी का पैसा भुगतान होगा। हमें नहीं चाहिए पैसे हमें सिर्फ हमारा भाई चाहिए। जानकारी करने पर पता चला कि टीकरी गांव में भी आत्महत्या करने वाले रामवीर के परिवार वालों को भी गन्ने का बकाया भुगतान मिल गया। इसी तरह से छपरौली में आत्महत्या की कोशिश करने वाले गन्ना किसान सहदेव को भी इस घटना के तुरंत बाद गन्ने का बकाया भुगतान मिल गया। 
अब सवाल ये उठता कि क्या जो आत्महत्या करेगा उसी को गन्ने का बकाया भुगतान मिलेगा। हालांकि अलग अलग समय में घटी ये चंद घटनाओं की बानगी है।  लेकिन यूपी के गन्ना मंत्री सुरेश राणा के गृह जनपद की चीनी मिल पर ताला और खेत में खड़े गन्ने को खराब होता देखकर कब कौन किसान आत्महत्या करने पर उतारू हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है।  एक रिपोर्ट में बताया गया है , कैसे कड़ाके की सर्दी में गन्ना बोने वाला किसान गन्ने का भुगतान पाने के लिए चीनी मिल से लेकर सड़क तक 45 डिग्री तापमान में पसीना बहाता है।
कागज की एक पर्ची तय करती है किसान का भविष्य जब किसान गन्ने की फसल को तैयार कर लेता है तो उसके बाद नम्बर आता है। गन्ने को चीनी मिल में पहुंचाने का लेकिन मिल में गन्ने को पहुंचाने का एक नियम है। नियमानुसार गन्ना मिल में बेचने के लिए किसान को गन्ना सहकारी समिति से एक पर्ची लेनी होगी। एक पर्ची पर किसान एक बार में 25 से 30 क्विंटल गन्ना ही मिल में ले जा सकता है। जिस किसान के पास पर्ची नहीं होती है। वह मिल में गन्ना नहीं बेच पाएगा।  पर्ची का फायदा ये होता है कि पर्ची होने पर चीनी मिल गन्ने का वो रेट किसान को देती है जो सरकार ने तय किया हुआ होता है।  इसलिए जिस किसान के पास पर्ची नहीं होगी उसे खुले बाजार में औने पौने दाम पर गन्ना बेचना पड़ेगा। आज भी चीनी मिलोंं गन्नाा किसानोंं का 13367 करोड़ रुपये बकाया है। लेकिन सरकार किसानोंं की कोई सुनवाई नहीं कर रही है।  ऐसे होता है पर्ची में फर्जीवाड़ा थानाभवन क्षेत्र में आने वाले सोहंटा रसूलपुर गांव के रहने वाले गन्ना किसान आशू बताते हैं कि गन्ना समिति में अपने अपने लोगों को पर्ची बांट दी जाती है। समिति से ऐसे.ऐसे लोगो को पर्ची मिल जाती है कि जिनके पास गन्ना उगाने के लिए जमीन तक नहीं है। वहीं इसी गांव के रहने वाले जाहिद मास्साब बताते हैं कि थानाभवन में आने वाली चीनी मिल बजाज को 13 अप्रैल को बंद कर दिया गया है। किसान का गन्ना लेने से मना कर दी गई है। जबकि सैकड़ों बीघा खेत में अभी भी गन्ना लगा हुआ है। समय से गन्ना न कटने के चलते अब गन्ना खराब भी होने लगा है। भाजपा मंत्री बोले गिरोह है मिल मालिकों का उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि 14 दिन में गन्ना किसानों को उनके गन्ने का भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। जनवरी का भुगतान लेने के लिए किसान मिलों के चक्कर लगा रहे हैं। इस बारे में जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सांसद और केन्द्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ. सतपाल सिंह से पूछा गया तो उनका कहना था कि बहुत सारे चीनी मिल ग्रुप ऐसे हैं जो पिछली सरकारों के गिरोह के रूप में काम कर रहे हैं।  लेकिन हमारी सरकार ने कहा है कि गन्ने का सीजन खत्म होने से पहले ही भुगतान कर दिया जाएगा। गन्ना अधिकारी और मिल का एक सयुंक्त बैंक खाता खोला जाएगा। इस खाते से पहले किसानों को भुगतान किया जाएगा। भुगतान में देरी होने पर किसान को ब्याज दिया जाएगा।
सपा के राजपाल बोले पर्ची में चलती है जुगाड़ सपा के एमएलसी राजपाल कश्यप का कहना है कि जिन किसानों को मिल के लिए पर्ची नहीं मिलती है वो मजबूरी में खुले बाजार में गन्ना बेचते हैं। और जुगाड़ से पर्ची हासिल करने वाले इसी का फायदा उठाकर किसान के उस गन्ने को सरकार द्वारा तय किए गए रेट से कम कीमत पर चीनी मिल में बेच देते हैं। सूबे की सरकार कुछ नहीं कर रही है।  किसानों का हजारों करोड़ रुपया आज भी चीन मिल पर बकाया है। चीनी मिल पर बकाया है किसान का 13367 करोड़ रुपये इस बारे में रालोद नेता जयंत चौधरी का कहना है कि 18 मई तक प्राइवेट और सरकारी चीनी मिलों पर किसानों का 13367 करोड़ रुपये बकाया है। अब धीरे.धीरे गन्ना मिल बंद होने का समय भी आ रहा है। लेकिन इसके बाद भी किसानों का पूरा भगुतान नहीं किया जा रहा है। किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर किया जा रहा है। खेत में गन्ना खड़ा हुआ है और थानाभवन विधानसभा क्षेत्र की चीनी मिल बंद हो चुकी है। अब किसान ऐसे में गन्ने को कहां ले जाए इस बारे में जब गन्ना मंत्री सुरेश राणा से बात की गई। तो उनका कहना था कि हमारी सरकार वादा कर चुकी है कि जब तक खेत में गन्ना है मिल बंद नहीं होने दी जाएगी।  लेकिन इसके बाद भी अगर कहीं ऐसी स्थिति है तो हम उस खेत का गन्ना दूसरी मिल में भेजने की व्यवस्था कर रहे हैं।


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