डूबे कर्ज, घोटालों की मार झेलते घरेलू बैंकिंग को कैसे पटरी लाएंगे नव वित्तमंत्री पीयूष गोयल
गोयल ने सार्वजनिक बैंक के प्रमुखों के साथ
बैठक के बाद यह बात कही. केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के अस्वस्थ होने के कारण गोयल
को कुछ समय के लिए वित्त मंत्रालय की भी जिम्मेदारी दी गयी है. जेटली गुर्दा
प्रत्यारोपण के बाद अभी स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। गोयल ने कहा, "हम यह सुनिश्चित करेंगे कि बैंकिग उद्योग सुव्यवस्थित तरीके से वृद्धि
करे." उन्होंने कहा कि "सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से उच्चतम स्तर की
सुचिता एवं जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है." गोयल को जेटली का करीबी माना
जाता है। केंद्रीय मंत्री
ने कहा कि जेटली की सेहत में अच्छी तरह सुधार हो रहा है. कल मुझे उनसे बात करने और
उनसे मार्गदर्शन लेने का अवसर मिला. उन्होंने कुछ मुद्दों के बारे में बताया और
मैं उन्हीं को लेकर आगे बढ़ रहा हूं। वित्त मंत्री ने
कहा, "हमारा पहला काम बैंकिंग प्रणाली को जल्दी से
जल्दी अपने पैरों पर खड़ा करना है और उस विरासत से पीछा छुड़ाना है जो हमारी सरकार
को 2014 में मिली थी." विरासत से उनका मतलब
सप्रंग सरकार के दौरान अजीबोगीब तरीके से बांटे गए कर्जों से था. कई कंपनियों
विशेषकर बिजली, इस्पात और दूरसंचार क्षेत्र की कंपनियां ने
बैंकों से कर्ज लिया और क्षेत्र से जुड़ी दिक्कतों एवं आर्थिक सुस्ती के कारण कर्ज
चुकाने में नाकाम रहीं। गोयल ने कहा कि
पिछले कुछ महीनों में कुछ घोटाले सामने आए हैं , जिसने बैंकों की
छवि धूमिल हुई तथा फंसे कर्ज की समस्या और बढ़ गयी. गोयल ने कहा कि मैं अपने सभी
सहयोगी बैंक अधिकारयों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लाखों
कर्मचारियों और बैंकिंग क्षेत्र के सभी हितधारकों तथा आरबीआई के मार्गदर्शन में , यह सुनिश्चित करेंगे की बैंकिंग क्षेत्र सुव्यवस्थित तरीके से वृद्धि करे और
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सर्वोच्च स्तर की सुचिता एवं जवाबदेही कायम हो जो
उनसे अपेक्षा की जाती है." उन्होंने यह नहीं बताया कि बैठक में किन किन
बिंदुओं पर चर्चा हुई है। अब देखना है कि वे किस तरीके से बैंकिंग में सुधार ला पाते हैं। न्यूयार्क की तर्ज पर बनेगा दिल्ली में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर
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