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पूरे‌‌ शहर को पेयजल की सप्लाई करते टैंक में नहाते हैं लोग, विभाग जानकर भी बना अंजान


सागर। जनपद में डुगडुगी पहाड़ी पर बने बैक प्रेसर टैंक जिससे पूरे सागर जनपद में पीने का पानी जाता है, यह जानकारी होने के बावजूद नगर निगम की लापरवाही के चलते वहां टैंक की सुरक्षा के लिए आज तक कोई भी सुरक्षाकर्मी नहीं तैनात किया गया है। जिसकी वजह से टैंक के अन्दर घुस लोगों को नहाते हुए आसानी से देखा जा सकता है। वहीं आसपास के गांव के बच्चे स्वच्छ पानी को गन्दा करते रहते है। सबसे दुर्भाग्य तो यह है कि यही पानी लोगों तक पीने के लिए भी  जाता है। 
बतादे कि डुगडुगी पहाड़ी पर बने बैक प्रेसर टैंक में राजघाट बांध से पानी को ऊंची डुगडुगी पहाडी़ पर लाया जाता है। जिसके बाद ऊंचाई से पानी बैक प्रेसर टैंक में डाला जाता है ताकि ऊंचाई से ही प्रेसर से पानी शहर तक पहुंच जाए। पड़ाड़ी पर बना ये टैंक बहुत ही संवेदनशील जगह पर बनाया गया है। लेकिन इसके बनने के बाद से ही यहां कभी कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं किया गया और न ही संवेदशीलता से इसकी सुरक्षा की गई । इस वजह से यहां आसपास के गांव के लड़के आने जाने लगे और उन्होंने इस टैंक के पानी को स्विमिंग पुल बनाकर नहाना शुरू कर दिया। यहाँ ये बच्चे बकायदा साबुन लगाकर शाही स्नान करते है। नहाने के के बाद वही गंदा पानी लोगो तक पीने के लिेए पहुँचता है। जिसके बारे में जानकारी देने जब जब नगर निगम पहुंचे तो वहां के जिम्मेदार अधिकारियो की लापरवाही और सागर के लोगों से खिलवाड़ की जो तस्वीर दिखाई दी वो और चौकाने वाली थी। जब निगम के उपायुक्त प्रणय कमल खरे से बात की गई तो उऩ्होंने तुरंत जल प्रदाय से इस काम को देखने वाले उपयंत्री राजसिंह राजपूत को बुलाया। जोकि वो एक बार के बुलाने से नहीं आये तो उऩ्हें दोबारा बुलाया गया। उपायुक्त ने जब उनसे पूछा कि यहां ये सब क्या हो रहा है तो उन्होंने अपना साफ पल्ला झाड़ लिया। और कहा ये काम तो इंजीनियर रामाधार तिवारी देखते हैं। आप लोग उनसे ही बात कर लीजिए। जिसके बाद उन्हें बुलाया गया। और जब उनसे पूछा गया कि इस पर आपने क्या कार्रवाई की है तो उनका कहना था कि पांच माह पहले प्रशासन को एक पत्र लिखा था पर वे उस पत्र की कॉपी तक उपलब्ध नहीं करा सके। जिस पर उन्होंने मीडिया से भी बात नहीं की और जल्द ही चैबर के बाहर हो गए। इसके बाद निगम आयुक्त ने अपने कर्मचारी से सभी जिम्मेदारों को कारण बताओं नोटिस जारी करने और 24 घंटे में जवाब देने का पत्र  टाइप करने के निर्देश दिये। जिसके बाद उन्होंने उपयंत्री रामाधार तिवारी को बुलाया और पूरा मामला जानना चाहा तो उऩ्होंने बताया कि पीएससी पाइप लाइऩ का काम पिछले करीब 10 से 12 सालों से राजसिंह राजपूत के पास ही है । उसकी सारी नोटसीट वही  लिखते हैं। उन्होंने यहां तक बताया कि पिछले कई सालों से यहां इंजीनियिरों में काम का बंटवारा ही नहीं हुआ जिसके चलते किसी के पास भी आर्डर की कॉपी नहीं है। उन्होंने कहा कि निगम में सब को पता है कि ये काम कौन देख रहा है। उन्होंने निगम उपायुक्त को बताया कि वो उन पर झूठा आरोप लगा रहा है। ऐसे में वे नौकरी छोड़कर चले जाने की बात कही। उपायुक्त ने इसी विभाग के आइआइ विजय दुबे को तुरंत सभी के कार्य का विभाजन करने और उसकी कॉपी सभी को तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिये । इसी दौरान इसी विषय को लेकर विजय दुबे और रामाधार तिवारी की बहस भी हो गई । वहीं बात आई टंकी की सुरक्षा को लेकर आनन फानन में दो चौकीदारों की वहां ड्यूटी लगाने के की बात की गई। लेकिन निगम में कर्मचारी न होने से ये मामला वही अटक गया। जिसके बाद बात हुई कि किसी विभाग से ले लें तो उस पर विभाग की नाराजगी मोल लेने का साहस किसी ने नहीं जुटाया। जिसपर रास्ता निकाला गया कि क्यों नहीं गोपालगंज पुलिस को पत्र लिख दिया जाये तो उनके बाज वहां सुबह शाम चक्कर मार आयेगे जिसमें कुछ सुरक्षा तो हो ही जायेगी। इसबीच उपायुक्त ने दोबारा उपयंत्री राजसिंह राजपूत को बुलाया लेकिन वे नहीं आये। वहा टंकी में गेट नहीं है। जिसके चलते टंकी पर कल भी वहा छोटे-छोटे बच्चे जायेंगे और नहायेंगे। और फिर से गंदगी करेंगे साबुन लगायेंगे। लेकिन उन्हें कौन रोकेगा ? जहां कोई सुरक्षा नहीं वहां यदि कोई शैतानी दिमाग लगा ले तो फिर सागर के लोगों को कौन बचायेगा ?  नगर निगम के बड़े पदों पर बैठे इन गौरजिम्मेदार लोगों पर कौन कार्रवाई होगी या नहीं ? और निगम के कर्मचारी अधिकारी कब सागर के प्रति जिम्मेदार होंगे और क्या दोषी अधिकारी कर्मचारो पर जांच के बाद उन पर कोई ठोस कार्रवाई हो पायेगी ?  ये सवाल अब भी सागर के लोगों के मन में हिलोरे मार रहे हैं।

रिपोर्ट - हेमंत आठिया (सागर 


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