साहित्यकारों की जन्मभूमि पड़ी है वीरान
....रिपोर्ट- रत्नम चौरसिया एडवोकेट
पुरवा/उन्नाव। कलम व तलवार की धनी जनपद की भूमि पर साहित्यकारों की जन्मभूमि व स्मृति स्थलों की दुर्दशा देखकर मन विचलित हो जाता है। किन्तु शासन व प्रशासन इस ओर मूक दर्शक बना हुआ है।
आज हम बात कर रहे हैं विश्व के सुप्रसिद्ध साहित्यकार पं० सूर्य कान्त त्रिपाठी 'निराला' जी के जन्म स्थली की। निराला जी का गांव पुरवा ब्लाक मुख्यालय से लगभग 15 किमी की दूरी पर बीघापुर मार्ग से बाई ओर स्थित है।
उनके जन्मस्थान गढ़ाकोला में बना निराला स्मृति उद्यान बदहाली का शिकार है। उसकी दुर्दशा देखकर हर किसी को रोना आ जायेगा। शासन व प्रशासन की नजर सिर्फ उनके जन्म दिन व निर्वाण दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों पर ही रहती है। उसके बाद पूरे वर्ष उन्हें भुला दिया जाता है। गढ़ाकोला गांव में बना निराला स्मृति उद्यान प्रशासन की उपेक्षा का शिकार है।
पार्क की बाउण्ड्रीवाल व झूले सब टूटे पड़े हैं। पार्क के चारों ओर गंदगी का अम्बार लगा हुआ है। इस पार्क में निराला जी की एक प्रतिमा तक नहीं लगी है। उद्यान के सामने एक निराला स्मृति भवन बना हुआ है जिसे एक स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा बनवाया गया था। किन्तु यहाँ भी निराला जी की एक प्रतिमा तक नहीं लगी है।
हमारे जनपद का बैसवारा क्षेत्र साहित्यिकरूप में बहुत ही सशक्त क्षेत्र रहा है। किन्तु वर्तमान में यह माना जा सकता है कि साहित्यकारों की जन्मभूमि व स्मृति स्थलों की उपेक्षा हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

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