कारगिल युद्ध के शहीदों को याद दिलाता है विजय दिवस
आज से 18 साल पहले भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल का युद्ध लड़ा गया था। भारत ने पाकिस्तान को कारगिल युद्ध में धूल चटाई थी। लगभग दो महीने तक चले इस युद्ध में दोनों देशों के कई सैनिक मारे गए थे और आज के दिन यानी 26 जुलाई 1999 में भारत ने कारगिल की जंग जीत ली थी, तभी से इस दिन को कारगिल विजय दिवस के रूम में मनाया जा रहा है। कारगिल की दुर्गम चोटियों में लड़े गए युद्ध में पाकिस्तान को करारी मात देते हुए भारतीय सेना के 527 जवानों अधिकारियों ने वीरगति पाई थी। इनमें 71 जम्मू कश्मीर से थे।
डेस्क। कारगिल युद्ध में शहीद सैकड़ों सैनिकों की शहादत के बाद मिली इस विजय को आज पूरा देश याद कर रहा है। इस मौके पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा, वायुसेना प्रमुख मार्शल बिरेंद्र सिंह धनोआ ने अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
1999 में दुश्मन देश को धूल जटाकर अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों की याद में पूरा देश कारगिल विजय दिवस माना रहा है। द्रास वॉर मेमोरियल में लोगों ने 1999 के कारिगल युद्ध में शहीद जवानों को श्रृद्धांजलि अर्पित की। आज उनके साहस व बलिदान की गाथा को याद किया जा रहा है।
इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट कर शहीदों को सलाम किया। उन्होंने लिखा कारगिल विजय दिवस पर प्रत्येक भारतीय हमारी सशस्त्र सेनाओं के प्रयासों व पराक्रम की सराहना करता है। सभी देशवासी कारगिल के शहीदों के परम बलिदान को नमन करते हैं हम उनके परिवारजनों के प्रति सदैव ऋणी रहेंगे।
विजय दिवस पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर शहीदों को याद किया। उन्होंने कहा कारगिल विजय दिवस पर हम उन सभी सैनिकों के साहस और सर्वोच्च बलिदान को सलाम करते हैं। जो 1999 में बहादुरी से लड़े। हर भारतीय को उनकी वीरता और साहस पर गर्व है।
वही केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी ट्वीट कर कहा कि कारगिल विजय दिवस पर हमारे सशस्त्र बलों के साहस, बहादुरी और त्याग का जश्न मानते हैं। हम सैनिकों के लिए हमेशा ऋणी रहेंगे, जिन्होंने हमारे राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता को संरक्षित किया है।
कैप्टन सौरभ कालिया के साथ पाक सेना की दरिंदगी
कारगिल विजय दिवस पर अपने बेटे कैप्टन सौरभ कालिया की मौत पर उनके पिता एन के कालिया ने कहाए श्तत्कालीन पीएमए रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री ने इस मामले पर ;पाकिस्तान में बंदी बनाने के दौरान हुई मौत परद्ध ध्यान देने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि इस मामले में पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत होगी लेकिन अब तक कुछ नहीं किया गया है।
1999 में दुश्मन देश को धूल जटाकर अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों की याद में पूरा देश कारगिल विजय दिवस माना रहा है। द्रास वॉर मेमोरियल में लोगों ने 1999 के कारिगल युद्ध में शहीद जवानों को श्रृद्धांजलि अर्पित की। आज उनके साहस व बलिदान की गाथा को याद किया जा रहा है।
इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट कर शहीदों को सलाम किया। उन्होंने लिखा कारगिल विजय दिवस पर प्रत्येक भारतीय हमारी सशस्त्र सेनाओं के प्रयासों व पराक्रम की सराहना करता है। सभी देशवासी कारगिल के शहीदों के परम बलिदान को नमन करते हैं हम उनके परिवारजनों के प्रति सदैव ऋणी रहेंगे।
विजय दिवस पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर शहीदों को याद किया। उन्होंने कहा कारगिल विजय दिवस पर हम उन सभी सैनिकों के साहस और सर्वोच्च बलिदान को सलाम करते हैं। जो 1999 में बहादुरी से लड़े। हर भारतीय को उनकी वीरता और साहस पर गर्व है।
वही केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी ट्वीट कर कहा कि कारगिल विजय दिवस पर हमारे सशस्त्र बलों के साहस, बहादुरी और त्याग का जश्न मानते हैं। हम सैनिकों के लिए हमेशा ऋणी रहेंगे, जिन्होंने हमारे राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता को संरक्षित किया है।
कैप्टन सौरभ कालिया के साथ पाक सेना की दरिंदगी
कारगिल विजय दिवस पर अपने बेटे कैप्टन सौरभ कालिया की मौत पर उनके पिता एन के कालिया ने कहाए श्तत्कालीन पीएमए रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री ने इस मामले पर ;पाकिस्तान में बंदी बनाने के दौरान हुई मौत परद्ध ध्यान देने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि इस मामले में पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत होगी लेकिन अब तक कुछ नहीं किया गया है।
क्या हुआ था कैप्टन कालिया के साथ
जब भी कारगिल युद्ध की बात होती है तो कैप्टन सौरभ कालिया का नाम सबसे पहले गूंजता है। कैप्टन सौरभ कालिया ने कारगिल में पाकिस्तानी सैनिकों की बड़ी घुसपैठ का सामना किया था। 5 मईए 1999 को कैप्टन कालिया और उनके 5 साथियों को पाकिस्तानी सैनिकों ने बंदी बना लिया था। 20 दिन बाद वहां से भारतीय जवानों के शव वापस आए। लेकिन अटॉप्सी रिपोर्ट सामने आईए तो पूरा देश में नाराजगी थीए जिसमें पता चला कि भारतीय जवानों के साथ पाकिस्तान ने बेरहमी की गई। उन्हें सिगरेट से जलाया गया था और उनके कानों में लोहे की सुलगती छड़ें घुसेड़ी गई थीं। सौरभ कालिया के साथ उनके पांच साथी नरेश सिंहए भीखा रामए बनवारी लालए मूला राम और अर्जुन राम भी थे। ये सभी काकसर की बजरंग पोस्ट पर गश्त लगा रहे थेए जब ये दुश्मन के हाथों पकड़े गए।
साभार - नई दुनिया
जब भी कारगिल युद्ध की बात होती है तो कैप्टन सौरभ कालिया का नाम सबसे पहले गूंजता है। कैप्टन सौरभ कालिया ने कारगिल में पाकिस्तानी सैनिकों की बड़ी घुसपैठ का सामना किया था। 5 मईए 1999 को कैप्टन कालिया और उनके 5 साथियों को पाकिस्तानी सैनिकों ने बंदी बना लिया था। 20 दिन बाद वहां से भारतीय जवानों के शव वापस आए। लेकिन अटॉप्सी रिपोर्ट सामने आईए तो पूरा देश में नाराजगी थीए जिसमें पता चला कि भारतीय जवानों के साथ पाकिस्तान ने बेरहमी की गई। उन्हें सिगरेट से जलाया गया था और उनके कानों में लोहे की सुलगती छड़ें घुसेड़ी गई थीं। सौरभ कालिया के साथ उनके पांच साथी नरेश सिंहए भीखा रामए बनवारी लालए मूला राम और अर्जुन राम भी थे। ये सभी काकसर की बजरंग पोस्ट पर गश्त लगा रहे थेए जब ये दुश्मन के हाथों पकड़े गए।
साभार - नई दुनिया

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