परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की ड्रेसों में शासनादेश की जमकर उड़ाई जा रही धज्जियां
निघासन खीरी। क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की ड्रेसो में शासनादेश की जमकर उड़ाई जा रही धज्जियां,व्यवस्था थी कि विद्यालय प्रबंध समिति का अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक बच्चों की ड्रेस स्कूल में ही नाप के अनुसार महिला स्वयं सहायता समूह के द्वारा सिलवाए और तभी ही मानक के अनुसार ड्रेस वितरित करवाई जाये।लेकिन कमीशन के खेल में नेताओं और अधिकारियों के गठजोड़ के आगे बच्चों को न तो मानक के अनुसार ड्रेस ही मिल पा रही हैं,और न ही कपडा व सिलाई ही मानक के अनुसार हैं।
वही ड्रेस सिलाई व वितरण स्वयं सहायता समूह से न वितरित कराकर प्राईवेट लोगों को अधिक कमीशन पर ठेके पर सारा काम शिक्षा विभाग के संरक्षण में किया जा रहा हैं।सबसे खास बात तो यह है कि सब कुछ जानने के बाद भी जिम्मेदार चुप बैठे हैं, न ही उनके रुख से पर्दा हट रहा और न ही कोई कार्रवाई हो रही हैं। बच्चों की ड्रेस के लिए जो 200 रुपये प्रति एक सेट ड्रेस के हिसाब से दो ड्रेस के सेट की चार सौ रुपये की धनराशि खातों में आती हैं। वह महंगाई के चलते पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। पिछले कई वर्षों से महंगाई बढ़ गई, लेकिन धनराशि उतनी की उतनी ही हैं। रही सही कसर कमीशन का खेल पूरा कर रहा है।
अब स्थिति यह है कि 200 रुपये के बजाय बच्चों को 120 रुपये से लेकर अधिकतम 150 रुपये तक की ड्रेस पहनाई नहीं उनके ऊपर थोपी जा रही हैं।विद्यालयों के अध्यापकों का कहना है कि उन्हें तो मजबूर कर ड्रेस दी गई। कहीं स्थानीय नेताओं का दबाव रहा तो कुछ स्थानों पर स्थानीय अधिकारियों की मूक रजामंदी से न चाह कर भी उन्हें ड्रेस खरीदनी पड़ी।ऐसा नहीं है कि जिम्मेदारों को नहीं पता हैं। लेकिन सभी जानबूझ कर चुप बैठे हुए हैं। दबी जुबान से कुछ अध्यापकों का कहना है कि एक बार गहराई से इसकी जांच हो जाये तो कौन कितना कमीशन ले रहा हैं,इसकी हकीकत खुलकर सामने आ जायेगी।यही कारण हैं,की परिषदीय विद्यालयों में मानकों को दरकिनार कर बच्चों के ड्रेसों में कमीशन खोरी की बूंँ आती दिख रही हैं।
कागजों तक सीमित होकर रह गई जांच टीम
बच्चों की ड्रेस की जांच के लिए शासन स्तर से तो टास्क फोर्स बनाए ही गए थे। अलग-अलग जिलों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वहीं जिला स्तर पर भी हर विकास खंड के लिए नोडल अधिकारी बनाकर उनके आधीन हर न्याय पंचायत पर अधिकारी लगाए गए, लेकिन ड्रेस वितरण पूरा हो गया। लोगों का कहना हैं,कि अगर अधिकारी सही से जांच कर लें तो सब कुछ सामने आ जाएगा।पर कमीशन खोरी के चलते सब संबंधित विभाग के अधिकारी भी मस्त रहते हैं।
....रिपोर्ट - श्रवण सिंह। (निघासन, लखीमपुर खीरी)

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