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युवक ने फ़ाँसी लगा कर, की आत्महत्या

उन्नाव। घरेलू विवाद के चलते एक युवक ने फ़ाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। वहीं गांव में रह रहे उसके पिता व भाई पोस्टमार्टम पहुंच गए।
प्राप्त जानकारी केअनुसार रजोल 35 पुत्र रामस्वरूप निवासी रामसिंह खेड़ा थाना अचलगंज का विवाह सोलह वर्ष पूर्व हुआ था। बीत चार साल पूर्व उसने काशीराम कालोनी में किराए के मकान को ले परिवार समेत रहने लगा। जहॉ उसने अपनेबच्चोआकाश 15 सलोनी 13 विकास 10 को नजदीकी प्राथमिक विद्यालय में भर्ती करा दिया। जिसके बाद दोनो दम्पत्ति दिहाड़ी मजदूरी कर जीवन यापन करने लगे। राजोले के पिता ने बताया कि उसने गावं में रहने के दौरान भी फांसी लगा कर आत्महत्या की कई बार कोशिश की। जिसमें उसके परिजनों को भनक लगते ही उसे बचा लिया था। बीतेगुरूवार की देर रात पहले पति पत्नी मे किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ जिसके बाद रजोल ने पहले पत्नी सीमा व सभी बच्चों को कमरे से जबरन बाहर कर दिया। जिसके बाद उसने फैन बाक्स में कपडा फसा कर आत्महत्या कर ली। इस दौरान सीमा व  बच्चोने खिड़की से हादसा होते देख वे सन्न रह गए। उन्होने आसपास शोर कर आसपास रह रहे लोगों को मामले की जानकारी दी। जिसके बाद अन्य ने दरवाजा तोड़ कर उसेफांसी से उतार पाते, उसकी मौत हो गई। जिसके बाद सूचना मिलने केबाद काशीराम कालोनी चौकी से पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।
वहीं पत्नी सीमा ने ससुर रामस्वरूप को मामले की जानकारी दी। जिसके बाद वे जिला अस्पताल पहुंच गए। जानकारी करने पर रामस्वरूप ने बताया कि रजोल कई बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका था। उन्होने बताया कि उसके पॉच बेटो में यह तीसरे नंबर का था। उनके बेटो में दुर्गाशंकर रविशंकर व रजोल उन्नाव में किराए के घर में रह रहे थे। वहीं उनके साथ कमलेश व धमेन्द्र रहते है।
मॉ का हो चुका है एक दशक पूर्व देहान्त
रामस्वरूप ने बताया कि रजोल की मॉ का देहान्त एक दशक पूर्व हो चुका है। जिसके बाद वह परेशान रहने लगा था। जब उनसे रजोल के बारे में मानसिक बीमारी को लेकर लगातार आत्महत्या को प्रेरित रहने के बावत पूछने पर वे सटीक जानकारी नहीं दे सके। 

आत्महत्या के प्रति प्रेरित रहना बीमारी है
डा0 अनवर सईद के अनुसार  अक्सर खुद को क्षति पहुचाने को लेकर अग्रसर रहना एक बीमारी का ही रूप है। सबसे बड़ी किवदंती यह है कि समाज में लोग इसे बीमारी का लक्षण नहीं मानते। उन्होने कहा कि इस का इलाज भी संभव है।

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