पेड़ों की अंधाधुंध कटान से प्राकृतिक असंतुलन बढ़ने का खतरा
-विकास के नाम पर काटे जा रहे पेड़ों के कारण आने वाली वाली गम्भीर समस्या से आम आदमी बना है अंजान
...रिपोर्ट : रत्नम चौरसिया, एडवोकेट।
...रिपोर्ट : रत्नम चौरसिया, एडवोकेट।
पुरवा/उन्नाव। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर सैकड़ों वर्ष पुराने पेड़ो को बलि का बकरा वन विभाग द्वारा बनाया जा रहा है। इससे जहां एक ओर प्राकृतिक संतुलन तो बिगड़ ही रहा है, तो वहीं दूसरी ओर राहगीरों को भी विभिन्न प्रकार की असुविधा का सामना करना पड रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार तौरा गांव से लेकर पुरवा मौरावां होते हुए कालूखेड़ा जबरेला तक सड़क चौड़ीकरण होना है, जिसका बजट प्रदेश सरकार ने पहले ही पास कर दिया है। करीब 270 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस मार्ग पर खड़े पेड़ पौधों की अंधाधुंध कटान जारी है। प्रश्न यह है कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान के लिए अनुमति किसने दे दी? जबकि एक आदमी अथवा किसान एक पेड़ कटाने की अनुमति के लिए वन विभाग व पुलिस के चक्कर काट-काट कर थक जाता है। हजारों की तादाद में काटे जा रहे पेड़ों से राजस्व तो करोड़ों रुपये मिल जाएगा पर प्रकृति को कितना नुकसान होगा, शायद इसका आकलन शासन व प्रशासन को नहीं है।
वन विभाग को सड़क के किनारे दोनो ओर वृक्षारोपण कराने की जिम्मेदारी होती है। अगर समय रहते वृक्षारोपण हो गया होता तो शायद आज इतनी बड़ी मात्रा में प्रकृति को नुकसान न पहुंचता। आपको अवगत करा दे कि सैकड़ों वर्ष पूर्व जब शेरशाह सूरी का शासन था, तब उसने भी सड़कों के किनारे वृक्षारोपण व सराय बनवाया था। इससे राहगीरों को सहूलियत मिलती थी। किन्तु आज का शासन व प्रशासन सिर्फ और सिर्फ वर्तमान समस्या का हल तो एन केन प्रकारेण खोज लेता है, किन्तु भविष्य के परिणामों से अनभिज्ञ रहता है। पेड़ कटान से राहगीरों को छाया भी नहीं मिल पाएगी और प्रकृति में आक्सीजन का अभाव भी रहेगा। पीपल, बरगद, नीम, जामुन जैसे औषधीय गुणों से पूर्ण पुराने पेड़ों को वन विभाग एक झटके में काट-काट कर बेंच रहा है। बेहतर होता कि प्रशासन सजगता दिखाता और कुछ समय पूर्व से ही सड़क के दोनों ओर पौधरोपण करा देता।

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