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रहस मेले में नगर पालिका कर्मचारियों के द्वारा की जा रही अवैध वसूली

सागर। जनपद के गढ़ाकोटा में होने वाला मेला रहस जो पहले मवेशी मेले के नाम से जाना जाता था जो आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है, करीब 35 वर्ष पूर्व इस मेले में उच्च नस्ल के हाथी, घोड़ा, गाय, बैल, भैंस, बकरी, समेत कई किस्म के पशु बिकने आते थे पूरे मेला रहस में सबसे ज्यादा पशु ही आते थे उन पशुओं की व्यवस्था के लिए नगर पालिका चारा पानी एवं व्यापारियों के लिए रहने का स्थान की व्यवस्था करती थी।  
इसी प्रकार की व्यापारियों को परेशानी ना हो इसके लिए पुलिस का इंतजाम भी नगर पालिका द्वारा कराया जाता था रात में व्यापारियों के साथ ही पशु मालिक  एवं  मेले में आने वाले लोगों के मनोरंजन के लिए मौत का कुआं , सर्कस राई नृत्य नौटंकी आदि मनोरंजन के साधन उपलब्ध होतेेे थे साथ ही रात भर जागकर राई काआनंद लेने के लिए सारी व्यवस्थाएं पालिका द्वारा की जाती थी  धीरे-धीरे इस मेले में व्यापारियों के साथ ही लोगों को होने वाली परेशानियों को किसी प्रकार का ध्यान न देने से पशु व्यापारी से लेकर पशु मालिक भी धीरे-धीरे कम मात्रा में आने लगे आज यह मेला अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है इसका एक कारण यह भी है कि पशु खरीद बिक्री में उसकी पंजीयन की व्यवस्था नगर पालिका करती है  जिसको  रमन्ना कहा जाता है जिससे पशु की पहचान होती है  उसके मालिक का नाम उसमें लिखा जाता है इससे आगे कोई  उसे  पशु को चोरी का साबित ना सके ।  इसमें दलाली व्यवस्था इतनी ज्यादा बढ गई है कि व्यापारी  यहां आने में काफी परेशानी महसूस कर रहा है ।
शुक्रवार के दिन  पशुओं के खरीद बिक्री के बाद होने वाले पंजीयन को पहले नगरपालिका घोड़ा गाय भैंस बैल बकरी  आदि  के शुल्क अलग अलग होते थे किंतु इस वर्ष पशुओं के पंजीयन शुल्क 60 रू कर दी गई । कर्मचारियों द्वारा पंजीयन शुल्क के साथ सुविधा शुल्क भी ली जा रही है।पर्ची जो 60 रूपये की कटती है उसके 100 लेने की बात सामने आई ।
पशु पालक, व्यापारी जिन्होंने पशुओं का क्रय विक्रय किया दुर्गाप्रसाद बंडा,सुंदर टेकरी, कलू बसारी, भूरा शाहपुर, राहुल रहली, अजमेर शाहपुर, नीरज सनौधा, मुकेश डिण्डौरी, विनोद शाहपुर, मंगल केशली, उन्होंने बताया कि हमसे पर्ची के नाम पर 100 रूपये लिए जा रहे हैं पर पर्ची 60 रूपये की ली जा रही है कुछ जागरूक युवकों ने इसका विरोध भी किया ।इन युवकों का कहना था कि 40 रूपये ज्यादा क्यो लिए जा रहे हैं । पंजीयन करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि सीएम्ओ पी एस राजपूत का कहना है कि 100 रूपये लो जबकि रजिस्टर में 60 रूपये ही दर्ज होते हैं।
 नगर पालिका द्वारा पंजीयन विभाग देख रहे सीताराम पटेल ने कहा किमेले में उस दिन करीब डेढ़ सौ से 200 पशुओं की पंजीयन के लिए आए हैं अभी पूरी जानकारी प्राप्त नहीं हुई है इस रहस मेले बड़ी संख्या में पशुओं की खरीद फरोक्त होती है तो 40 रूपये के हिसाब से कितने पैसे लिए जाते होंगे यह तो नगरपालिका अधिकारी व कर्मचारियों को ही पता होगा लेकिन इस सब के बीच क्रय विक्रय करने वाले पशु पालक व व्यापारी अपने आप को ढगा सा महसूस कर रहे है।
...रिपोर्ट : हेमंत आठिया, सागर,मध्यप्रदेश।  

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