Ad

style="width:640px;height:100px;" alt="ads" /> ads

Breaking News


उन्नाव - राशन की दुकान हासिल करने के लिये अनेकानेक सरकारी योजनाओं को हड़पने वाले दबंगो ने  फर्जी अंधता प्रमाण पत्र बनवा राशन की दुकान भी आवंटित करा ली दबंगो की दबंगई से शिकायत करने वाले शिकायतकर्ता भी शिकायत लेते है वापस,
भाजपा नेत्री एवम सभासद ने उठाई जांच की मांग।
विकास खण्ड सफीपुर के कटरी क्षेत्र की ग्राम पंचायत रूपपुर चंदेला में एकदबंग परिवार शासन की सभी योजनाओं पर अपनी दबंगई के बल पर कब्जा करने में माहिर है इस गांव के निवासी रघुबीर सिंह ने अपनी दबंगई एवम मजबूत पकड़ से गांव की आंगनबाड़ी कार्यकत्री का पद अपनी एक बहू के नाम करा लिया सबसे छोटे बेटे को शिक्षा मित्र बनवाया साक्षरता मिशन में अपनी दूसरी बहू को प्रेरक बनवाया इतने में भी उनका मन नही भरा तो गांव की रिक्त राशन की दुकान जो भूतपूर्व सैनिक /अंधता प्रमाणपत्र धारक के नाम आरक्षित की गई थी!!अंधता प्रमाण पत्र हासिल करने के लिये  उन्होनो जालसाजी का सहारा लिया और अपने दूरस्थ रिस्तेदार तत्कालीन प्रभारी चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डाक्टर अजित सिंह से मिलकर अपनी पत्नी कुशमा देबी जो पूरी तरह स्वस्थ एवम ठीक आंखों वाली थी को अंधा साबित कर फर्जी ढंग से अंधता प्रमाणपत्र हासिल किया जिसे प्रभारी चिकित्साधिकारी ने 15 सितम्बर 2008 को 70 प्रतिशत विकलांगता का जारी किया जिस पर जब पूर्ति कार्यालय ने आपत्ति जताई तो 20 जनवरी 2009 को 100 प्रतिशत की अंधता का प्रमाण पत्र उन्ही प्रभारी चिकित्साधिकारी डाक्टर अजित सिंह के पैनल ने द्वारा जारी किया जाना दर्शाकर राशन की दुकान साठगांठ कर हासिल कर लीं ग्रामीणों को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होनो हासिल किए गए फर्जी अंधता प्रमाणपत्र पत्र पर सवालिया निशान लगा जांच की मांग की जिस पर दबंग परिवार ने शिकायतकर्ता पर दबाव बना अपने पक्ष में शिकायत वापस करा हलफनामा दिलवा दिया था। शिकायतकर्ताओं पर दबंगई करने के कारण कोई भी ग्रामीण शिकायत नही करता और दबंग विभागीय साठगांठ से राशन की दुकान संचालित कर रहा है!!इस गम्भीर जालसाजी को लेकर भाजपा नेत्री एवम नगर पंचायत सफीपुर की सभासद मृदुला शर्मा ने उच्चाधिकारियों से मिलकर फर्जी प्रमाणपत्र पर सवालिया निशान उठाते हुए जांच की मांग की उन्होंने अपर जिलाधिकारी बीएन यादव से  तहसील दिवस में मिलकर मांग की किसी सक्षम अधिकारी के नेतृत्व में नेत्र बिशेषगो का जांच दल बनाकर निष्पक्ष जांच कराए जाने को कहा है जिन्होंने जांच का आश्वासन दिया।
अब देखना यह है कि निष्पक्ष जांचकर दूध का दूध और पानी अलग होगा या फिर जांच कार्यवाही फाइलों में कैद होगी।
मुख्यचिकत्साधिकारी कार्यालय सूत्रों की माने तत्कालीन सफीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी चिकित्साधिकारी डाक्टर अजीत सिंह द्वारा जारी किए गए सभी विकलांग प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके है । अब प्रश्न यह है कि जब ऐसा हो चुका है तो यह अंधता प्रमाणपत्र भी निरस्त होना चाहिए उंसे क्यो नही किया गया यह एक प्रश्न विभागीय दुरभिसंधि की ओर इसारा करता है ।

No comments