नौनिहालों का बेकार हो रहा बचपन
उन्नाव। (मगरवारा से tpn report)
सरकार सर्वशिक्षा अभियान के तहत लाखो रुपये खर्च करके सभी नौनिहालो को शिक्षित करने की कोशिश में जुटी है।इसके बावजूद ग्रामीण इलाको में आज भी तमाम बच्चे शिक्षा से महरूम है।गाँवों की गलियों एवं सड़कों के किनारे काफी बच्चे पीठ पर थैला लटकाये अक्सर कूडा़ बीनतेनजर आ जाते हैं। जिस उम्र में पढ़ने लिखने के लिए उनके हाथ पेन और किताबें होनी चाहिए वहाँ वे कूड़े के ढे़र में अजीविका के लिए जद्दोजहद करते हैं। इसे ग्रामीण लोगों की गरीबी या बेबसी कहा जाये या फिर सरकारी तन्त्र की लापरवाही यह एक बडा़ प्रश्न है । क्षेत्रीय लोगों की माने तो नौनिहालों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए किये जा रहे प्रयास सही तरह से नही हो रहे है । महज कागजी कार्यवाही करके जिम्मेदार औपचारिकता पूरी करते हैं । ग्रामीण लोगों को जागरूक करने के प्रयास पूरे मन से नही किये जाते हैं न ही उनकी समस्याओ पर गौर किया जाता है । इसी का नतीजा है कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद भी हालत में पर्याप्त सुधार नही हो पाया है।लोगों का मानना है कि इस दिशा में ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है।
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| कूड़ा बिनते बच्चे |

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