रेफर कर देना सीएचसी के लिये मामूली खेल
उन्नाव। जिले में 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। एक तो विशेषज्ञ
चिकित्सकों की व्यापक कमी होने से सभी सीएचसी पर मानक के अनुसार विशेषज्ञ
चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। उनके स्थान पर जिन डॉक्टरों की तैनाती है
उनमें भी अधिकतर अस्पताल में नहीं रहते वह पड़ोसी जिलों से आते जाते। एक
डॉक्टर के सहारे सीएचसी चलती है। वह भी रोगी को अस्पताल में न रो
क जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं।
मानक के अनुसार हर सीएचसी में एनेस्थेटिस्ट, फिजीशियन, गायनकोलॉजिस्ट, सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञ, दो चिकित्साधिकारी और चिकित्साधीक्षक की तैनाती होनी चाहिए। जिले की 13 सीएचसी में मगरायर और पाटन में पांच-पांच डॉक्टर के ही पद हैं यहां चिकित्साधिकारी प्रथम व द्वितीय के पद नहीं हैं। जिले में 179 डॉक्टरों के पदों के सापेक्ष 167 डॉक्टरों की तैनाती है। जहां तक विशेषज्ञ चिकित्सकों का सवाल है तो जिले की किसी भी सीएचसी में फिजीशियन, हड्डी रोग विशेषज्ञ की कहीं तैनाती नहीं है। सफीपुर में गायनकोलाजिस्ट डॉ. अंजनी सिंह की तैनाती है इसके अलावा कहीं भी गायनकोलॉजिस्ट की तैनाती हैं। संविदा की आयुष डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है। एनेस्थेटिस्ट में डॉ. देवेश दास व डॉ. राजेश कुमार नवाबगंज और डॉ. राजेंद्र कुमार की हसनगंज में तैनाती है। इनमें डॉ. देवेश दास हाल ही में टार्च की रोशनी में आपरेशन के मामले में निलंबित हो चुके हैं। हसनगंज के डॉ. राजेंद्र का स्थानांतरण हो चुका है। जिले में एक सर्जन डॉ. अखिलेश विक्रम हैं उनकी तैनाती नवाबगंज में है। विशेषज्ञ चिकित्सक भले ही न हो लेकिन तैनाती सभी जगह मानक के अनुरूप है। सभी सीएचसी पर लेवल-1 और लेवल-2 के डॉक्टरों की तैनाती कर रखी गई है। इस तरह डॉक्टरों की कमी तो नहीं है लेकिन जिन डॉक्टरों की तैनाती है वह अस्पताल परिसर के आवासों या मुख्यालय पर नहीं रहते हैं। इससे रात में आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार करने के बाद एंबुलेंस मुहैया करा जिला अस्पताल या लखनऊ मेडिकल कालेज अथवा ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
नियमानुसार जहां सीएचसी में आवास हैं डॉक्टरों को वहीं रहना है। जहां आवास नहीं हैं वहां के डॉक्टरों को अस्पताल मुख्यालय पर ही किराए का भवन लेकर रहना होता है इसके लिए सरकार उन्हें हाउस रेंट एलाउंस देती है। लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। कागज पर डॉक्टरों ने लोकल निवास का पता दे रखा है। जिन सीएचसी के भवन अपग्रेड हुए हैं उनमें आवास हैं लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें अलॉट नहीं कराया है। सरकारी आवास खाली पड़ा है और डॉक्टर हाउस रेंट एलाउंस ले रहे हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के निवास न करने से प्रशासन भी अनजान नहीं है। डीएम रविकुमार एनजी ने अस्पताल मुख्यालय पर न रहने वाले डॉक्टरों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरु करा दी है। इसके लिए पड़ोसी जनपदों से आने जाने वालों को कार्रवाई के लिए सूचीबद्ध कराया जाएगा और उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
क जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं।
मानक के अनुसार हर सीएचसी में एनेस्थेटिस्ट, फिजीशियन, गायनकोलॉजिस्ट, सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञ, दो चिकित्साधिकारी और चिकित्साधीक्षक की तैनाती होनी चाहिए। जिले की 13 सीएचसी में मगरायर और पाटन में पांच-पांच डॉक्टर के ही पद हैं यहां चिकित्साधिकारी प्रथम व द्वितीय के पद नहीं हैं। जिले में 179 डॉक्टरों के पदों के सापेक्ष 167 डॉक्टरों की तैनाती है। जहां तक विशेषज्ञ चिकित्सकों का सवाल है तो जिले की किसी भी सीएचसी में फिजीशियन, हड्डी रोग विशेषज्ञ की कहीं तैनाती नहीं है। सफीपुर में गायनकोलाजिस्ट डॉ. अंजनी सिंह की तैनाती है इसके अलावा कहीं भी गायनकोलॉजिस्ट की तैनाती हैं। संविदा की आयुष डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है। एनेस्थेटिस्ट में डॉ. देवेश दास व डॉ. राजेश कुमार नवाबगंज और डॉ. राजेंद्र कुमार की हसनगंज में तैनाती है। इनमें डॉ. देवेश दास हाल ही में टार्च की रोशनी में आपरेशन के मामले में निलंबित हो चुके हैं। हसनगंज के डॉ. राजेंद्र का स्थानांतरण हो चुका है। जिले में एक सर्जन डॉ. अखिलेश विक्रम हैं उनकी तैनाती नवाबगंज में है। विशेषज्ञ चिकित्सक भले ही न हो लेकिन तैनाती सभी जगह मानक के अनुरूप है। सभी सीएचसी पर लेवल-1 और लेवल-2 के डॉक्टरों की तैनाती कर रखी गई है। इस तरह डॉक्टरों की कमी तो नहीं है लेकिन जिन डॉक्टरों की तैनाती है वह अस्पताल परिसर के आवासों या मुख्यालय पर नहीं रहते हैं। इससे रात में आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार करने के बाद एंबुलेंस मुहैया करा जिला अस्पताल या लखनऊ मेडिकल कालेज अथवा ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
नियमानुसार जहां सीएचसी में आवास हैं डॉक्टरों को वहीं रहना है। जहां आवास नहीं हैं वहां के डॉक्टरों को अस्पताल मुख्यालय पर ही किराए का भवन लेकर रहना होता है इसके लिए सरकार उन्हें हाउस रेंट एलाउंस देती है। लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। कागज पर डॉक्टरों ने लोकल निवास का पता दे रखा है। जिन सीएचसी के भवन अपग्रेड हुए हैं उनमें आवास हैं लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें अलॉट नहीं कराया है। सरकारी आवास खाली पड़ा है और डॉक्टर हाउस रेंट एलाउंस ले रहे हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के निवास न करने से प्रशासन भी अनजान नहीं है। डीएम रविकुमार एनजी ने अस्पताल मुख्यालय पर न रहने वाले डॉक्टरों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरु करा दी है। इसके लिए पड़ोसी जनपदों से आने जाने वालों को कार्रवाई के लिए सूचीबद्ध कराया जाएगा और उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।

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