गूगल से प्रदूषण बोर्ड की नजर रहेगी सब पर
ईट भट्ठों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं को प्रदूषण का बड़ा कारण मानते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सभी भट्ठा मालिकों को अपने भट्ठे की लोकेशन को गूगल पर दर्ज कर इसका प्रिंट एनजीटी व यूपीपीसीबी को भेजने के आदेश दिए हैं। जिससे अधिकारी बिना किसी से पता पूछे व कभी भी भट्ठे की जांच करने पहुंच सकें।
एनजीटी का मानना है कि भट्ठों से निकलने वाला धुंआ वातावरण को सबसे अधिक प्रदूषित करता है। इसे देखते हुए ईट भट्ठों की जांच अब नए सिरे से करवाई जाएगी। अभी तक क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के सामने इनके निरीक्षण में रास्तों के साथ भट्ठों की लोकेशन ढूंढ़ने में परेशानी होती थी। इसका प्रमुख कारण यह है कि जिले के अधिकतर ईंट भट्ठे मुख्य मार्गों से कई-कई किलोमीटर दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में अधिकारी अधिकतर भट्ठों तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। इसे देखते हुए एनजीटी ने सभी भट्ठा स्वामियों को अपने भट्ठे को इंटरनेट की मदद से अक्षांश व देशांतर पर सुरक्षित करना होगा। गूगल पर इसकी लोकेशन दर्ज करने के बाद इसका ¨प्रट क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों को देना होगा। प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों की माने तो भट्ठों की आनलाइन लोकेशन दर्ज कराने का निर्णय एनजीटी ने लिया है। जल्द ही यह प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।
एनजीटी का मानना है कि भट्ठों से निकलने वाला धुंआ वातावरण को सबसे अधिक प्रदूषित करता है। इसे देखते हुए ईट भट्ठों की जांच अब नए सिरे से करवाई जाएगी। अभी तक क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के सामने इनके निरीक्षण में रास्तों के साथ भट्ठों की लोकेशन ढूंढ़ने में परेशानी होती थी। इसका प्रमुख कारण यह है कि जिले के अधिकतर ईंट भट्ठे मुख्य मार्गों से कई-कई किलोमीटर दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में अधिकारी अधिकतर भट्ठों तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। इसे देखते हुए एनजीटी ने सभी भट्ठा स्वामियों को अपने भट्ठे को इंटरनेट की मदद से अक्षांश व देशांतर पर सुरक्षित करना होगा। गूगल पर इसकी लोकेशन दर्ज करने के बाद इसका ¨प्रट क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों को देना होगा। प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों की माने तो भट्ठों की आनलाइन लोकेशन दर्ज कराने का निर्णय एनजीटी ने लिया है। जल्द ही यह प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।

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