शौच योजना में सब कुछ हवा हवाई
उन्नाव। शौच आदि के खुले से जाने के लिए बनी महत्वाकांक्षी योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है। वहीं योजना में भष्ट्राचार की बू आने लगी है । प्रशासन को दंड धाराओ के नाम से मिले हथियार में अभी से जंग पड़ती नजर आ रही है। ज्ञात हो खुले मे शौच इत्यादि करने वालों के खिलाफ प्रशासन कार्यवाही कर उन्हे दडिंत करने वाले इस प्रावधान में बाकायदा मुकदमा पंजीकृत गैर कानूनी कार्रवाई करने अधिकार मिल चुका है जिसमें जुर्माना के साथ छह माह की सजा भी है। धारा 269, 270, 336 के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया जाता है। इसके अलावा पहले खुले में शौच करने वालों को समझाया जाता है कि इससे बीमारी के साथ आर्थिक नुकसान भी सामने आता है। जिला पंचायत राज अधिकारी राघवेंद्र प्रसाद यादव के अधीन चल रही योजना के अन्तर्गत गंगा किनारे का शहर होने के कारण स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत जनपद में स्वच्छता मिशन के अंतर्गत 31 दिसंबर 2017 तक सारे कार्य पूर्ण किए जाने थे, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते व आम नागरिको की उदासीनता के चलते शौचालय हवा हवाई बनता नजर आ रहा है।
4 बजे से होनी थी गांव की निगरानी-
जिला पंचायत राज अधिकारी के अधीनस्थ इस योजना के अन्तर्गत सभी गांवो की मानीटरिंग होनी थी। जिसमें सरकारी आंकड़ो की माने तो अब तक 1687 राजस्व गांव में 139 राजस्व गांव ओडीएफ खुले में शौच मुक्त गांव हो पाए हैं। लेकिन साफ तौर पर उसके द्वारा दिए गए आंकड़े ही झूठे निकल रहे है। इसमें सबसे पहले गंगा के किनारे के गांव को प्राथमिकता दी जानी थी। ओडीएफ जनपद का दर्जा दिलाने की प्राथमिकता के अन्तर्गत इस योजना में जिला पंचायत राज अधिकारी राघवेंद्र प्रसाद यादव के अधीन ग्रामीण लोगों द्वारा सुबह 4ः00 बजे से निगरानी की ड्यूटी शुरू हो जानी थी। उसी दौरान गांव गांव जाकर खुले में शौच करने वाले ग्रामीणों से मुलाकात कर इससे होने वाले नुकसान के विषय में बताया जाना उस आयोजन मे शामिल था। इसके लिए बाकयदा ग्रामीणों की निगरानी के लिए एक समिति भी राजस्व गांव में बनाई गई, जिसमें 10 लोगों के साथ लोटा पार्टी नाम से निगरानी समिति होती है। लेकिन इतने तामझाम के बावजूद सबकुछ हवा हवाई ही साबित होता दिख रहा है।
हर तरीके से समझाया जाता है, फिर भी मानते नहीं-
नाम न छापने की शर्त पर अधीनस्थ कर्मचारियों ने खुलकर अपनी बात रखी। उनके अनुसार खुले में शौच के लिए जा रहे लोगों को समझाना अपने आप में बड़ा चैलेज जैसा ही होता है। कभी कभी तो कुछ लोग झगड़े पर उतारू हो गए। फिर भी काफी हद तक वे सफल हो सके है। वे कहे भले कितना ही, जब तक खुद ही लोगों के जेहन में यह बात नहीं उतरेगी। तब तक खुले में वे शौच को जाते रहेंगे। खुले करने से बीमारी के साथ आर्थिक नुकसान भी होता है और घर की बेटी बहू और नई नवेली दुल्हन को भी शर्मसार होना पड़ता है। शर्मसार होने से बचने के लिए घर शौचालय ही एकमात्र विकल्प है। शौचालय जागरूकता को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के एक माह से अधिक हो जाने के बाद भी पूरे जनपद की तश्वीर अभी तक नहीं बदल सकी है। नवाबगंज विकासखंड के सलेमपुर को ही देख ले वहॉ पर अधिंकाश केघर के बाहर ट्रैक्टर खड़ा है, हाथों में मोबाइल है लेकिन शौच के लिए बाहर जाते हैं। यहॉ एक हाथ मैं लोटा दूसरे में मोबाइल सलेमपुर की पहचान बन गई है।
बाजार में खरीददारी के लिए निकली महिलाओं को शौच को लेकर करना पड़ता है शर्मिंदगी का सामना
प्रशासन की सौच इत्यादि करने वालो को दडिंत करने की उचित कार्यवाही के बीच सुलभ शौचालय आदि की संख्या व पेशाब के लिए आम जनमानस को शहर व कस्बों के रिहायशी एरिया मे होने वाली परेशानियों का जवाब देने में असमर्थ हर बार साबित होता है। यदि शहर का निरीक्षण करें तो बामुस्किल दो या तीन ही शौचालय शहर में चालू हालत में है। इसके अलावा पेशाब के लिए राहगीरों समेंत व्यवसायियों को अपने व्यवसायिक प्रतिष्ठान के इर्द गिर्द ही झांकना पड़ता है। जिसके दौरान उन्हे शर्मिदंगी का भी सामना करना पड़ जाता है। वहीं शहर की बाजारों में धवनरोड, बड़ा चौराहा, पुरानी बाजार, छोटा चौराहा, गांधीनगर, केंशरगंज, अस्पताल रोड, रउ टैम्पों अड्डा व कचहरी के आसपास बनी बाजारों में खरीददारी कर रही महिलाओं को शौचालयों के न होने के चलते भारी मुसीबतो के दो चार होना पड़ जाता है।
खुले में शौच के लिए जा रही वृद्धा बाइक से जा टकराई, मौत
घर में शौचालय न होना एक अधेड़ महिला को उस वक्त भारी पड़ गया। जब वह शौच के लिए जंगल की ओर जा रही थी। उसी समय दूसरी तरफ से आ रहे बाइक सवार को कोहरे में महिला न दिख सकने से तेज रफ्तार बाइक उससे जा टकराई। टक्कर लगते ही महिला व बाइक सवार दोनो सड़क पर जा गिरे। बाइक सवार के हेलमेट लगाए होने के चलते उसे ज्यादा चोट नहीं आई। वहीं महिला गंभीर रूप से घायल हो गई राहगीरों की सूचना पर परिजन उसे लोहचा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। जहॉ उसकी हालत गंभीर देख चिकित्सकों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहॉ उसे इलाज के दौरान मृतक घोषित कर दिया।
प्राप्त जानकारी अनुसार सोमवती 60 पत्नी प्रेमशंकर यादव निवासी सिंकन्दरपुर कर्ण थाना बीघापुर के पति पुराने ख्यालातो होने के चलते उन्होने अभी तक घर में शौचालय नहीं बनवाया है। जिसके चलते वे तथा उनके घर के सभी लोग शौचालय के लिए जंगल जाते हैं। रोजाना की तरह सोमवती सोमवार की सुबह शौचालय के लिए जंगल जा रही थी। तभी शुक्लागंज की ओर जा रहा बाइक सवार राजेन्द्र सिंह कोहरे के चलते वृद्धा को नहीं देख सका। जिससे उसकी बाइक तेज रफ्तार के साथ उससे जा टकराई। टक्कर लगते ही दोनो सड़क पर जा गिरे। हालांकि हेलमेट लगे होने के चलते राजेंन्द्र सिंह को गहरी चोट नहीं आई। राहगीरो ने हादसा होते देख शोर मचा दिया। जिस पर घबड़ाए बाइक सवार ने सड़क पर गिरने से बुरी तरह टूट गई बाइक को वहीं छोड़ मौके से भाग निकला। राहगीरों की सूचना पर पहुंचे परिजनो ने लोहचा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंन्द्र ले गए। जहॉ चिकित्सकों ने उसकी हालत गंभीर देख जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहॉ पहुंचने पर चिकित्सा के दौरान उसे मृतक घोषित कर दिया।

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