लंबे समय से घाटा उठा रहे किसान क्या समर्थन मूल्य से उबर पाएंगे
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| खाश रिपोर्ट |
कई सालों से लगातार घाटा उठा रहे आलू उत्पादकों को सरकार ने राहत देने का काम किया है। समर्थन मूल्य घोषित करने से किसानों को अब कोल्ड स्टोरेज में आलू नहीं छोड़ना पड़ेगा। साथ ही किसान यह मानते हैं कि समर्थन मूल्य के बाद जब तक सरकार आलू को खरीदने के लिए क्रय केंद्र नहीं खुलती तब तक उनके लिए भारी मुसीबत बनी रहेगी। यदि उनकी माने तो उन्हें आलू व्यापारियों को ही बेचना पड़ेगा लेकिन यह जरूरी ही नहीं कि वह व्यापारी सरकार द्वारा समर्थित मूल्य पर ही आलू ले। सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य से किसान राहत मिलना तो बताते हैं लेकिन वह इस समर्थन मूल्य से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि समर्थन मूल्य नौ सौ से एक हजार प्रति ¨क्वटल होना चाहिए।
नवाबगंज की अजय एक लंबे समय से आलू का व्यवसाय करते आ रहे हैं उनके अनुसार आलू का घाटा आलू ही पूरा करता है यह कहावत आप समय की मार के साथ देवी बढ़ती जा रही है वह एक लंबे समय से आलू की खेती में लंबा नुक्सान उठाते आ रहे हैं उनके अनुसार नुकसान की वजह से ही उन्होंने इस बार छह बीघा में आलू बोया है सरकार के समर्थन मूल्य से राहत तो मिलेगी पर समर्थन मूल्य कम है कम से कम एक हजार रुपया प्रति ¨क्वटल होना चाहिए। लेकिन सरकार ने घाटा उठाते आ रहे किसानों को उबारने का काम किया है।
कोल्हापुर के संतोष तिवारी के अनुसार वह एक लंबे समय से आलू का व्यवसाय करते आ रहे हैं। उनके अनुसार सरकार ने जो समर्थित मूल्य घोषित किया है उससे किसानों को लागत के साथ साथ उचित पैसा मिल पाएगा 13 बीघा आलू की खेती करने वाले प्रगतिशील किसान ने कहा कि तीन साल से आलू किसान को घाटा उठाना पड़ रहा है। सरकार ने जो समर्थन मूल्य घोषित किया है उससे कोल्ड स्टोर में आलू छोड़ने की नौबत नहीं आएगी। समर्थन मूल्य 900 रुपये ¨क्वटल मिलना चाहिए।
मनिकापुर के आलू किसान शत्रुघ्न से समर्थन मूल्य को लेकर उनकी राय जानी चाहिए तो उन्होंने कहा कि इस बार भी उन्होंने 5 बीघे आलू लगाए हैं विगत 3 वर्षों से आलू की खेती में काफी नुकसान हो चुका है किसान बदहाली की कगार पर पहुंच चुका है सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य कम है इससे आलू उत्पादकों को मरहम तो लगा है पर भला नहीं होगा।
मोती खेड़ा के मुकेश राजपूत के अनुसार आलू की खेती अब किसी चुनौती से कम नहीं है। विषम परिस्थितियों के बाद जी-तोड़ मेहनत से फसल लगाई जाती है। लेकिन बाद में फायदा कुछ नहीं नजर आता। जिससे आलू की खेती से किसान विमुख हो रहे है। समर्थन मूल्य की घोषणा से राहत मिली है। लेकिन यह राहत अभी आधी अधूरी है
देव मऊ के राजेश कुशवाहा के अनुसार वह काफी लंबे समय से तो खेती नहीं कर रहे हैं। लेकिन एक छोटे से समय में आलू को लेकर काफी जानकारी हासिल कर ली है। उनके अनुसार हर वर्ष 6-7 बीघे में आलू लगाई जाती है लेकिन सही मूल्य न मिलने से काफी नुकसान उठाना पड़ता है । सरकार ने समर्थन मूल्य घोषित कर मरहम लगाया है लेकिन इसे और बढ़ाया जाना चाहिए। क्योंकि राहत तब मिलेगी जब मूल्य एक हजार रुपया ¨क्वटल हो।
पांच बीघा आलू की खेती करने वाले प्रगतिशील किसान जुबेर आलम निवासी हसनगंज के अनुसार कई वर्षों से आलू की खेती कर रहा हूं। पिछले तीन वर्ष से घाटा उठा रहा था। कोल्डस्टोर में ही आलू छोड़नी पड़ी थी। सरकार ने समर्थन मूल्य घोषित कर आलू उत्पादकों को राहत देने का काम किया है।


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