उन्नाव। सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए तो दवाओं का अकाल रहता है।
पर वह मेडिकल स्टोर तक पहुंच रही हैं । पूर्व में मियागंज के एक मेडिकल
स्टोर पर सरकारी अस्पताल की दवाएं पकड़ी भी जा चुकी हैं। प्रतिबंधित
इंजेक्शन और टेबलेट ही नहीं स्प्रिट तक की बिक्री का खेल पुराना है। पूर्व
में भी इस तरह का खुलासा हो चुका है। खेल में अस्पताल के ही कर्मचारियों की
संलिप्तता है लेकिन उसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग इन पर रोक नहीं लगा पा
रहा है। हसनगंज में सरकारी अस्पताल की सर्जिकल स्प्रिट पीने से हुई युवक की
मौत ने विभाग की करतूत उजागर कर दी है।
योगी सरकार के पास नहीं है धन, बेंच रही अखिलेश सरकार के कार्य
दरअसल युवा पीढ़ी में नशे के लिए नींद के इंजेक्शन, टेबलेट और ऐसे
अल्कोहल की लत बढ़ी है जिसमें किसी तरह की खुशबू नहीं आती है। अभी तक नींद
के इंजेक्शन और टेबलेट आसानी से मेडिकल स्टोरों पर मिल जाते थे। लेकिन
शेड्यूल एच वन लागू हो जाने के बाद अब मेडिकल स्टोरों पर नींद की टेबलेट
तथा फोर्टविन, फेनरगान जैसे इंजेक्शन नहीं मिल पाते हैं। इससे नशे के लती
लोगों ने सरकारी अस्पतालों के कर्मचारियों से तार भिड़ा लिए और उनके सहारे
प्रतिबंधित दवा व इंजेक्शन हासिल कर लेते हैं। पहले भी पकड़ी जा चुकी है सरकारी दवा
पहले सरकारी सप्लाई में नीली स्प्रिट आती थी। इसे नशेबाज प्रयोग करते
थे, इससे इसकी आपूर्ति पर रोक लगा सफेद स्प्रिट का प्रयोग शुरू किया गया।
लेकिन नशे के लती इसका भी सेवन करने लगे हैं। इसका खुलासा हसनगंज में
स्प्रिट पीने से हुई एक युवक की मौत के बाद हुआ। इसके पूर्व मियागंज सीएचसी
के पास स्थित एक दवाखानों में सरकारी अस्पताल की दवाएं मिलने का मामला
चर्चा में रहा है। इससे साफ है कि इस खेल में अस्पताल कर्मचारियों की ही
संलिप्तता है। नींद के काम आने वाली दवा, इंजेक्शन और स्प्रिट इमरजेंसी के
साथ वार्ड और ओटी में दी जाती है। जिसके खर्च का कर्मचारियों को लेखा जोखा
देना पड़ता है।
सीएमएसडी को दी गई है 150 बोतल स्प्रिट
नशेबाज तक सर्जिकल स्प्रिट कैसे पहुंची और उसे दवा स्टोर के किस
कर्मचारी ने बेचा यह पुलिस जांच का ¨बदु है। पुलिस उसे ¨चहित करने के लिए
साक्ष्य संकलन में भी लगी है। जिला अस्पताल के दवा स्टोर में हाल ही में
लगभग 350 बोतल सर्जिकल स्प्रिट आई थी। एक सप्ताह पूर्व सीएमओ के अधीन दवा
स्टोर सीएमएसडी जहां से सीएचसी पीएचसी को दवा जाती है से जिला अस्पताल से
स्प्रिट की मांग की गई थी। जिस पर जिला अस्पताल स्टोर से 150 बोतल स्प्रिट
सीएमएसडी को उधार दी गई थी। जिला अस्पताल दवा स्टोर के प्रभारी फार्मासिस्ट
एबी मिश्र ने बताया कि जो स्प्रिट सीएमएसडी को दी गई थी उस पर भी जिला
अस्पताल की मोहर लगी है। सीएमएसडी से हसनगंज सीएचसी को भी सप्लाई भेजी गई
है। अब सवाल यह उठता है कि जब मृतक का साथी यह बता रहा है कि उसने जिला
अस्पताल से स्प्रिट की बोतल खरीदी थी तो फिर यह चूक हुई कन्हा पर, बतौर मृतक के साथी के अनुसार वह कर्मचारी और जहां से खरीदी उस
स्थान की भी पहचान कर लेगा।
मेडिकल स्टोर में ब्लैक हो रही मरीजों के लिए आई सरकारी दवा
Reviewed by voiceofawadh.blogspot.com
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February 18, 2018
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