ई-वे बिल के बीच पीस रहे उद्यमी व कारोबारी
कानपुर। केंद्र और राज्य ई-वे बिल के बीच उद्यमी व कारोबारी बुरी तरह पिस
रहे हैं। केंद्र का ई-वे बिल जेनरेट कर दूसरे राज्य से लाया जा रहा माल
प्रदेश में पकड़ा जा रहा है। केंद्रीय गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सीजीएसटी) के
अधिकारियों के मुताबिक उनका ई-वे बिल मान्य है, बस इसे अनिवार्य नहीं किया
गया है। इसे जेनरेट करने वाले पर जुर्माना नहीं लगाया जा सकता। दूसरी ओर
स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स (एसजीएसटी) के अधिकारी साफ कह रहे हैं कि
प्रदेश में उनका ही ई-वे बिल लागू होगा। वैसे दोनों के विवाद के बीच
कारोबारियों को सबकुछ होने के बाद ही जुर्माना देना पड़ रहा है।
प्रदेश में 31 जनवरी 2018 तक राज्य का ई-वे बिल लागू था। एक फरवरी 2018 को केंद्र का ई-वे बिल लागू किया गया था। इसके लिए 29 जनवरी को ही आदेश जारी हो गया था। एक फरवरी को केंद्र का ई-वे बिल जेनरेट नहीं हो रहा था और कारोबारी इसे जेनरेट करने में बुरी तरह परेशान हो गए थे। इसके बाद देर रात जीएसटी काउंसिल ने केंद्रीय ई-वे बिल को जेनरेट करने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया था। इसके बाद नौ फरवरी की रात 12 बजे से राज्य में एक बार फिर स्टेट का ई-वे बिल लागू कर दिया गया था। इसके बाद भी भ्रम के चलते तमाम लोग केंद्रीय ई-वे बिल जेनरेट करते रहे। ट्रायल के तौर पर चल रहा केंद्रीय ई-वे आसानी से जेनरेट हो जाता है और कई दूसरे राज्यों में प्रदेश सरकारों ने अपना ई-वे बिल लागू नहीं किया, वहां ज्यादातर कारोबारी केंद्रीय ई-वे बिल ही जेनरेट कर रहे हैं। इन सभी को प्रदेश में रोका जा रहा है। इस तरह के फरवरी में ही बड़ी संख्या में मामले हो चुके हैं।
प्रदेश में 31 जनवरी 2018 तक राज्य का ई-वे बिल लागू था। एक फरवरी 2018 को केंद्र का ई-वे बिल लागू किया गया था। इसके लिए 29 जनवरी को ही आदेश जारी हो गया था। एक फरवरी को केंद्र का ई-वे बिल जेनरेट नहीं हो रहा था और कारोबारी इसे जेनरेट करने में बुरी तरह परेशान हो गए थे। इसके बाद देर रात जीएसटी काउंसिल ने केंद्रीय ई-वे बिल को जेनरेट करने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया था। इसके बाद नौ फरवरी की रात 12 बजे से राज्य में एक बार फिर स्टेट का ई-वे बिल लागू कर दिया गया था। इसके बाद भी भ्रम के चलते तमाम लोग केंद्रीय ई-वे बिल जेनरेट करते रहे। ट्रायल के तौर पर चल रहा केंद्रीय ई-वे आसानी से जेनरेट हो जाता है और कई दूसरे राज्यों में प्रदेश सरकारों ने अपना ई-वे बिल लागू नहीं किया, वहां ज्यादातर कारोबारी केंद्रीय ई-वे बिल ही जेनरेट कर रहे हैं। इन सभी को प्रदेश में रोका जा रहा है। इस तरह के फरवरी में ही बड़ी संख्या में मामले हो चुके हैं।
कौन लौटाएगा जुर्माने की राशि
केंद्रीय अधिकारी अपने बिल को सही तो बता रहे हैं पर एसजीएसटी के
अधिकारियों ने जो जुर्माना वसूल लिया है उसे कौन लौटाएगा, इस पर अभी कुछ
नहीं कहा जा रहा है।
जीएसटी काउंसिल को पत्र लिखा
केंद्रीय ई-वे बिल को लेकर लग रहे जुर्माने को लेकर अखिल भारतीय उद्योग
व्यापार मंडल के महामंत्री ज्ञानेश मिश्रा ने जीएसटी काउंसिल के चेयरमैन
को पत्र लिखा है कि केंद्रीय ई-वे बिल की साइट पूरी तरह बंद कर दी जाए
क्योंकि इसके चक्कर में कारोबारियों को जुर्माना चुकाना पड़ रहा है।
नोडल अधिकारी सीजीएसटी चंचल तिवारी के अनुसार केंद्रीय ई-वे बिल मान्य है। इसे अमान्य नहीं किया जा सकता क्योंकि दो फरवरी को जारी आदेश में इसकी अनिवार्यता को खत्म किया गया है, ट्रायल के आधार पर लोग इसे जेनरेट कर सकते हैं। उस पर जुर्माना नहीं लगा सकते।
एडीशनल कमिश्नर एसजीएसटी आरके श्रीवास्तव के अनुसार राज्य सरकार की तरफ से साफ नोटिफिकेशन है कि राज्य में माल के परिवहन
पर स्टेट ई-वे बिल लागू होगा। अधिकारी उसके आधार पर ही कार्य कर रहे हैं।
बाहर से आने वाले माल पर स्टेट ई-वे बिल होना चाहिए।

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