अनुदेशकों-शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री को दिया ज्ञापन
उन्नाव। 32000
अंशकालिक अनुदेशकों को सम्मानजनक मानदेय महिला अंशकालिक अनुदेशकों को बेचने
का अवकाश आदि मांगों को लेकर पूर्व माध्यमिक अनुदेशक कल्याण समिति ने
मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया है।
समिति सदस्यों ने बताया कि
प्रदेश सरकार 17000 रुपए मानदेय का शासनादेश जारी किया जाए जो कि 2017 में
पैब की बैठक में पास हुआ था। केंद्र सरकार से बजट भी जारी कर दिया गया था।
इसके साथ ही अंशकालिक अनुदेशकों का स्वतरू नवीनीकरण का शासनादेश जारी करने
की भी मांग की गई है। इस मौके पर पत्रिका से बातचीत करते हुए समिति के
प्रदेश सचिव शशांक मिश्रा ने कहा कि महिला अंशकालिक अनुदेशकों को वैतनिक
अवकाश प्रदान किया जाए। इसके साथ ही अपने घरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर
तैनात अनुदेशकों का स्थानांतरण की सुविधा प्रदान कर यथासंभव उनके गृह
विकासखंड में तैनाती दी जाए।
गौरतलब है परिषदीय उच्च प्राथमिक
स्कूलों में अंशकालिक अनुदेशकों की तैनाती जुलाई 2013 में की गई थी। तैनाती
के बाद से अनुदेशक शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार का प्रयास किए हैं। अपने
ज्ञापन में पूर्व माध्यमिक अनुदेशक कल्याण समिति के प्रदेश सचिव व जिला
अध्यक्ष शशांक मिश्रा ने कहा है कि अंशकालिक अनुदेशकों के द्वारा लगातार 5
वर्षों से परिषदीय प्राथमिक शिक्षा में योगदान दिया जा रहा है। इसको देखते
हुए अनुदेशकों को जल्द से जल्द सम्मानजनक मानदेय देने का निर्णय लिया जाए।
इस
मौके पर उन्होंने योगी आदित्यनाथ को भदोही और सुल्तानपुर की अनुदेशकों की
जनसभा का संबोधन याद दिलाया। जिसमें उन्होंने कहा था अनुदेशकों के पक्ष में
जल्द ही सम्मानजनक मानदेय का निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के
इस निर्णय से सकारात्मक संदेश जाएगा और आपके द्वारा घोषणा पत्र सबका साथ
सबका विकास का संदेश भी पूर्ण होगा। इस मौके पर शशांक मिश्रा, रवि रावत
बृजेश रावत, पूनम पटेल, सुधीर अवस्थी, विश्वजीत द्विवेदी, कुलदीप यादव सहित
अन्य लोग मौजूद थे। अपने ज्ञापन में समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
को सम्मानित पीठ के पीठाधीश्वर बताते हुए अपनी मांग रखी है।
शिक्षामित्रों ने भी दिया ज्ञापन
योगी
सरकार उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पारित आदेश जिसमें कहा गया था कि
शिक्षामित्रों को 12 माह 62 वर्ष तक करके सभी शिक्षामित्रों को स्थायित्व
प्रदान करें। मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की सरकार अपने यहां कार्य शिक्षा
मित्रों को स्थायित्व प्रदान कर चुकी है। इस संबंध का एक ज्ञापन उत्तर
प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने योगी आदित्यनाथ को दिया है।
उत्तर
प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने ज्ञापन के दौरान मुख्यमंत्री से मांग
की है कि विगत 9 अगस्त 2017 को पारित अधिनियम में वर्णित अधिकारों से
शिक्षामित्रों को अच्छादित करते हुए न्यूनतम अहर्ता प्राप्त करने हेतु 4
वर्षों की छूट दें। जैसा कि उक्त अधिनियम को उत्तराखंड की सरकार ने अपने
शिक्षामित्रों को पद पर रहते हुए लाभान्वित किया है।
फरियादियों को नहीं मिली आशा
मुख्यमंत्री
के आगमन को देखते हुए अपनी फरियाद पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में फरियादी
निराला प्रेक्षागृह पहुंचे। इनमें काफी को निराशा हाथ लगी। जिन्होंने
जुगाड़ करके पास बनवा लिया। वह अंदर पहुंचे मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने में
सफल रहे।शिक्षामित्रों ने 62 वर्ष नौकरी और 12 माह वेतन का भी लाभ देने की
मांग की है। अपने ज्ञापन में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने कहा
है कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 2.35 लाख संविदा शिक्षकों का समायोजन करने
का निर्णय लिया है और 18 5000 संविदा कर्मचारियों को 62 वर्ष तक की सेवा
में अन्य विभागों की तरह सभी लाभ देने का निर्णय लिया गया है।
उत्तराखंड
और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षामित्रों के साथ किए गए सकारात्मक कदमों
को प्रदेश सरकार में भी लागू करने की शिक्षा मित्र संघ ने मांग की है।
पत्रिका से बातचीत के दौरान उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिला
अध्यक्ष सुधाकर तिवारी ने बताया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
शिक्षामित्रों के हित में सकारात्मक कदम उठाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने
कहा कि शीघ्र ही सरकार शिक्षामित्रों के हित में ठोस निर्णय लेगी। ज्ञापन
देने वालों में जिला अध्यक्ष सुधाकर तिवारी, कुलदीप शुक्ला, ज्ञान दीक्षित,
रेखा सिंह चंदेल, भानु प्रताप सिंह, रामेंद्र द्विवेदी आदि शामिल थे।
--------------------------

No comments