Ad

style="width:640px;height:100px;" alt="ads" /> ads

Breaking News

गुरू पूर्णिमा एक प्राचीन त्योहार - प्रेम नारायण चौरसिया



...रिपोर्ट - रत्नम चौरसिया एडवोकेट
पुरवा/उन्नाव। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बृहस्पतिवार को बाजारों की रौनक काफी देखने लायक रही, इस दौरान आम व्यापारियों ने आमों की बढ - चढकर अच्छी कीमत वसूली गई।

प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह की पूर्णिमा को आषाढ़ी का पर्व बड़े हर्ष के साथ मनाया जाता है। इसे गुरु पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। संस्कृत भाषा के विद्वान व एक विद्यालय के संस्थापक प्रेम नारायण चौरसिया ने बताया कि इस पर्व को पौराणिक कथाओं के अनुसार व्यास पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।

उन्होंने बताया कि इस त्योहार में गाय के गोबर से घरों के चारों ओर रेखा बनाई जाती है। यह बहुत प्राचीन परम्परा है। इससे यह मान्यता है कि घरों के चारों ओर ऐसा करने से कीटाणु प्रवेश नहीं करते हैं। इस दिन घुइयां व दाल से भरी बेढ़ई व फलों के राजा आम से पहले आषाढ़ी-आषाढ़ा(गाय के गोबर से बनाए गए पुतले) की पूजा की जाती है।

प्राचीन काल में ऐसी मान्यता थी की आषाढ़ माह की पूर्णिमा को यह पूजा करने से अच्छी वर्षा होगी और किसान लाभान्वित होगा। लेकिन महंगाई के इस दौर में गरीबों को आम खरीदना भी दुर्लभ हो रहा है। आज क्षेत्र की लगभग सभी बाजारों में आम के दाम ऊंचे रहे। आमो की प्रजाति मे चौसा आम के दाम सबसे उचे 80-100 रुपये प्रति किलो रहे, वही सफेदा 40-50 रुपये प्रति किलो बिका। जिसके चलते आम व्यापारियों ने आज अच्छे दाम वसूले।

No comments