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50 छात्राओं के पोषाहार भोज्य बना बिल बना दिया 350 छात्राओं का





मामले के प्रकाश में आने के बाद, शिक्षिका व छात्राओं ने खोला मोर्चा
सीकर। छात्राओं से जुड़ा पोषाहार के घपले होने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। जहाँ एक ओर संख्या के हिसाब से सीकर जिले के दूसरे नंबर के माने जाने वाले विद्यालय राजकीय सावित्री बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय लक्ष्मणगढ में जम कर पोषाहार के घपले होने की पुष्टि हुई है। इस मामले में जब हकीकत पर नजर डाली गई तो पूरा घपला खुलकर सामने आया। इस संवाददाता ने मामले को लेकर छात्राओं से चर्चा की तो उन्होंने ना केवल घटिया पोषाहार के बारे में बताया बल्कि पोषाहार के घपले में होने वाले भ्रष्टाचार की भी जानकारी दी। वहीं स्कूल की शिक्षिकाओं ने भी पोषाहर में खुले भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी व स्कूूली शिक्षा निदेशक को भी अवगत करवाया।
वहीं स्कूली शिक्षिका विमला महरिया ने बताया कि  बीकानेर स्थित स्कूली शिक्षा निदेशालय के निदेशक नथमल को बाकायदा पत्र लिखकर सारी स्थिति की जानकारी दी है। महरिया सहित कई शिक्षिकाओं ने बताया है कि स्कूल में केवल 50 बालिकाओं का ही पोषाहार बनाया जा रहा है, जबकि बिल करीब 350 का उठाया जा रह है। वहीं दूसरी ओर स्कूल की बालिकाओं ने भी बताया है कि कभी पोषाहार मिलता है और कभी नहीं मिलता है। वहीं दूसरी ओर स्कूल की प्राचार्य मोहिनी ढाका ने इससे इन्कार किया है। इसके अलावा छात्राओं को दिए जा रहे दूध में भी घपला होने की बात कही गई है। इसमें बताया गया है कि दूध भी बेहद कम मंगाया जा रहा है और केवल खानापूर्ति के लिए कुछ बालिकाओं को ही दूध दिया जा रहा है। बालिकाओं ने भी मीडिया से पूछने पर बताया कि दूध कभी मिलता है, कभी नहीं मिलता है।
वहीं इस सम्बन्ध में जिला शिक्षा अधिकारियों को भी मामले की सूचना मिली है। इसके बाद संभवतया गुरुवार को जांच टीम भेजी जा सकती है। अंग्रेजी की शिक्षिका महरिया ने भी बताया कि पोषाहा र में गड़बड़ी का मामला काफी लम्बे समय से चल रहा है। कई बार स्कूल की अन्य शिक्षिकाओं ने भी टोका है लेकिन लगातार होती गड़बड़ी के चलते उससे रूका नहीं गया और विरोध करना पड़ा।

बच्चे ही कर रहे झाड़ू पोंछा
वहीं छात्राओं ने बताया कि स्कूल का झाड़ू पोंछा भी उन्हें ही करना पड़ता है। स्कूल में एकमात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है और वह केवल शिक्षिकाओं को पानी पिलाने में ही लगा रहता है, जबकि स्कूल में झाड़ू निकालना, पोंछा लगाना, पानी भरना आदि काम भी छ़ात्राओं से ही करवाया जाता है। ऐसे में सफाई व्यवस्था भी ढंग से नहीं हो पाती है तो साथ ही छात्राओं के बीमार होने का भी खतरा मंडराता रहता है।

मुकेश कुमावत 
लक्ष्मण गढ़ 
राजस्थान  

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