कई वर्ष बीत जाने के बाद भी आवंटियों को नहीं मिल सका कब्जा
...रिपोर्ट - रत्नम चौरसिया। (एडवोकेट)
पुरवा/उन्नाव। पुरवा तहसील की ग्राम पंचायत अहेसा में सन् 2011-13 में की गई कृषि आवंटित जमीन पर कई वर्ष बीत जाने के बाद आज भी आवंटियों को कब्जा नहीं मिल सका, कब्जा न मिलने को लेकर आवंटियों ने पोर्टल के द्वारा कब्जा दिलाने की मांग भी की। लेकिन लेखपाल की काली करतूत के चलते वह भी बेकार साबित हो गया।
कब्जा दिलाने की माँग कर रहे भोला पुत्र गंगाराम,गुड्डू पुत्र महादेव समेत तमाम लोंगो ने जब मामले को लेकर पोर्टल पर शिकायत की थी उसके बाद जांच के दौरान कार्यरत लेखपाल राम पियारे ने अधिकारियों को भ्रमित करते हुए तहसील कार्यालय में ही बैठकर कब्जा दिला देने की झूठी रिपोर्ट पोर्टल द्वारा अधिकारियों को प्रेषित कर दिया। पोर्टल द्वारा प्राप्त निस्तारण रिपोर्ट में भोला पुत्र गंगाराम को बताया गया की भूमि की गाटा संख्या 336 मि.रकबा 0.3160 हेक्टेयर की मौके पर जाकर ग्रामीणों की उपस्थिति में पैमाइस करके निशानदेही करा कर कब्जा दिला दिया गया।
अनपढ़ भोला ने जब यह रिपोर्ट मीडिया के सामने रखा तो हकीकत का पता चला की लेखपाल ने जिस भूमि नम्बर पर कब्जा दिला देने की झूठी रिपोर्ट लगा रहा है उक्त गाटा संख्या में रकबा ही नही है। जो उक्त गाटा संख्या में रकबा है वह किसी और के नाम भूमिधरी दर्ज कागजात है। गुड्डू पुत्र महादेव को भी कब्जा दिला देने की झूठी रिपोर्ट प्राप्त हुई। निस्तारण रिपोर्ट मे ग्रामीणों की उपस्थिति में ग्राम प्रधान उमाशंकर रावत व एक अन्य ने गवाही हस्ताक्षर बनाए।
लेखपाल और ग्राम प्रधान की झूठी करतूतो को उन्नाव के ही एक समाचार पत्र ने प्रकाशित किया तो अपनी झूठी करतूत की खबर पढ़कर ग्राम प्रधान आग बबूला हो गया था और 2 जुलाई सन् 2018 की शाम को ग्राम प्रधान अपने लाव लश्कर के साथ पत्रकार रामबाबू के घर पहुँचकर अभर्दता करते हुए सीधे देख लेने की धमकी दिया और दूसरे दिन 3 जुलाई सन् 2018 को ग्राम प्रधान तहसील समाधान दिवश में झूठी शिकायत लेकर पहुंच गया।
जिस व्यक्ति के नाम झूठी शिकायत समाधान दिवश में दिया वह व्यक्ति अपने घर से कही गया ही नही। यह जानकारी पत्रकारों को हुई तो पत्रकारों ने एस डी एम पुरवा अनिल सिंह को एक ज्ञापन दिया, जिस पर एस डी एम पुरवा ने कहा मामला गम्भीर है जाँच कर उचित कार्यवाही का अश्वाशन पत्रकारों को दिया था। महीनों का समय बीत जाने के बाद भी आज तक न तो कोई जाँच हुई और ना ही कोई कार्यवाही। तो अब सवाल यह उठता है कि क्या हर शिकायती पत्र की तरह यह ज्ञापन भी रद्दी की टोकरी में चला गया। यदि शीघ्र ही इस मामले का हल न निकाला गया तो भ्रष्टाचार पर रोक लगाना असम्भव प्रतीत होगा।

No comments